बांस की खेती किसानों के लिए बनी संजीवनी 

बांस की खेती के जरिए प्रदेश में कई किसान अपनी जिंदगी बदल रहे हैं। किसानों को बेम्बु फॉर्मिंग से आर्थिक रूप से अच्छी आमदनी हो रही है। इन किसानों को करीब 7 करोड़ 20 लाख रुपए की सब्सीडी राज्य सरकार द्वारा एक साल में दी गई है

बांस की खेती किसानों के लिए बनी संजीवनी 


हर चार साल में लाखों की लकड़ी साथ में पत्तियों से बनी जैविक खाद भी 
भोपाल। बांस की खेती के जरिए प्रदेश में कई किसान अपनी जिंदगी बदल रहे हैं। किसानों को बेम्बु फॉर्मिंग से आर्थिक रूप से अच्छी आमदनी हो रही है। इन किसानों को करीब 7 करोड़ 20 लाख रुपए की सब्सीडी राज्य सरकार द्वारा एक साल में दी गई है। 
राज्य सरकार किसानों से बांस की खेती करने के लिए प्रेरित भी कर रही है और इसके लिए सब्सिडी भी दी जा रही है। बांस का पौधा लगाने के बाद हर चौथे साल करीब 40 फीट लम्बे हो जाते हैं। प्रति बांस लगभग 100 रुपए के हिसाब से बिकता है। इनकी बिक्री से किसानों को लाखों रुपए की आय हो सकती है। इस साल 3 हजार से ज्यादा किसानों द्वारा 4443 हेक्टेयर क्षेत्र में बांस रोपण किया जा रहा है।  इसके लिए इस वित्तीय वर्ष में करीब 10 करोड़ 60 लाख रुपए का अनुदान दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि पिछले साल 3597 किसानों ने 3520 हेक्टेयर क्षेत्र में बांस की खेती हुई। इसके अलावा 83 सेल्फ हेल्प ग्रुप्स के जरिये 1020 हेक्टेयर क्षेत्र में बांस का रोपण हुआ है। कुल 129 स्व-सहायता समूहों द्वारा 2428 हेक्टेयर क्षेत्र में बांस रोपण किया जा रहा है।

पत्तियों से बनती है उच्च गुणवत्ता वाली खाद 
बांस की बिक्री के साथ हर चौथे साल प्रति एकड़ एक हजार क्विंटल बांस की सूखी पत्ती भी मिलती है। ये पत्तियां गाड़कर मिट्टी के साथ उच्च गुणवत्ता वाली कंपोस्ट खाद बन जाती है। यह खाद खेतों में डालने से खेतों की मिट्टी उपजाऊ हो जाती है और फसलों को भी बहुत पोषक तत्व मिलते हैं। इस खाद की बिक्री भी जैविक खाद के रूप में होती है जिससे किसानों को अतिरिक्त आय हो सकती है। 

नहीं लगता परिवहन खर्च, आसानी से मिलता है परमिट 
अमूमन बांस के खरीरददारों के साथ किसानों के कंॉट्रेक्ट इस तरह के होते हैं कि वे खेत में आकर ही फसल ले जाते हैं। ऐसे में परिवहन खर्च भी नहीं होता। इसके अलावा मध्य प्रदेश के वन विभाग में लकड़ी, बांस उत्पादक किसानों और ट्रांसपोर्टर्स की आसानी के लिए परमिट आॅनलाइन मिल सकेंगे। परमिट जारी करने के लिए एप्लिकेशन एप भी लाँच किया गया है। इसमें वनोपज व्यापारी और किसान लकड़ी-बांस के स्टेट और इंटरस्टेट ट्रांसपोर्ट के लिए आॅनलाइन परमिट प्राप्त कर सकेंगे।