कोरोना के बाद होली की बाजारों में धूम, घर पर भी तैयार कर सकते हैं हर्बल रंग

लॉकडाउन के बाद इस बार लोगों में होली को लेकर बहुत उत्साह है, लेकिन केमिकल रंगों से होने वाली परेशानियों के चलते लोग इस बार हर्बल रंगों की तरफ ज्यादा जा रहे हैं। 

कोरोना के बाद होली की बाजारों में धूम, घर पर भी तैयार कर सकते हैं हर्बल रंग

दिल्ली।    होली का पर्व मात्र दो दिन बाद है और तीसरे दिन रंगों की बौछार बहेगी। ऐसे में बाज़ार में रंगों की दुकानें सजने लगी हैं और उनकी खरीदी के लिए भी भीड़ लग रही है। लॉकडाउन के बाद इस बार लोगों में होली को लेकर बहुत उत्साह है, लेकिन केमिकल रंगों से होने वाली परेशानियों के चलते लोग इस बार हर्बल रंगों की तरफ ज्यादा जा रहे हैं। 
रासायनिक रंगों से होली खेलने पर कभी-कभी लंबे समय तक इलाज कराना पड़ता है। कुछ लोगों की त्वचा पर जिंदगीभर के लिए दाग बन जाते हैं। होली की मस्ती बरकरार रखनी है तो हर्बल रंग का क्रेज बढ़ा है। होली के लिए रंगों का बाजार सज रहा है। हर बार की तरह इस बार भी अधिकतर दुकानों पर गुलाल और केमिकल रंग हैं, लेकिन प्राकृतिक या हर्बल रंग भी कई दुकानों पर उपलब्ध हैं। हर्बल रंग महंगे तो हैं लेकिन इनके फायदे भी बहुत हैं। इन प्राकृतिक रंगों से त्वचा मुलायम बनी रहेगी और सौन्दर्य में भी निखार आता है। होली खेलने के बाद इन रंगों को छुड़ाने में कोई मशक्कत भी नहीं करनी पड़ती, बस एक बार साबुन या शैंपू लगाया और रंग साफ। आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र वर्मा कहते हैं कि प्राकृतिक रंग से त्वचा मुलायम हो जाती है। अगर ये वास्तविक हों तो इन रंगों के जरिए विभिन्न फूलों व वनस्पतियों का तेल भी त्वचा को मिलता है। 

घर पर भी तैयार कर सकते हैं हर्बल रंग

-नारंगी रंग बनाने के लिए रात भर मेहंदी की पत्तियों को पानी में भिगों दें, सुबह होली खेलें।
-गहरा गुलाबी रंग बनाने के लिए चुकंदर को पानी में उबाल लें, रंग तैयार हो जाएगा।
-लाल रंग के फूलों को रात भर पानी में भिगों दे तो पानी का रंग हल्का पीला हो जाएगा।
- ब्लूबेरी के रस से नीला रंग तैयार किया जा सकता है।
-सूखे लाल चंदन को लाल गुलाल की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। 
- सिन्दूरिया के बीजों को पीस कर गाढ़ा लाल रंग बनाया जा सकता है।