चली कुल्हाड़ी, घोंसले टूटे, बच्चे मरे, पेड़ कटे, नेता घूमने निकले: भगवान भरोसे रतलाम
रतलाम में लगातार छाती के नाम पर हो रही पेड़ों की कटाई। गुरुवार को भी कस्तूरबा नगर डोंगरे नगर रोटरी गार्डन के सामने कई इलाकों में हुई बेदर्दी से कटाई विभागों को मिलेंगे नोटिस।
डोंगरे रोड से कस्तूरबा नगर तक छंटाई के नाम पर कटाई
रतलाम@newsmpg। रतलाम शहर में हरियाली के खिलाफ सुनियोजित अभियान चल रहा है। यह कल्पना नहीं बल्कि हालातों को देखकर समा आ रहा सच है। बुधवार को ही डोंगरे नगर मेन रोड पर हरे पेडो की बलि ले ली गई। ऐसा ही कुछ अस्सीफीट पर, अलकापुरी में, जवागर नगर एक्टेंशन में, त्रिवेणी रोड पर, दिलीप नगर में भी हुआ। अलग- अलग कारण और हवाला देकर कहीं पुरानी अनुमति तो कहीं बिल्कुल बिना अनुमति पेड़ों की निर्मम हत्या कर दी गई।
इतना ही नहीं बल्कि आगे कस्तूरबा नगर में कॉलोनी के अंदर सड़क निर्माण के नाम पर 60 से अधिक वर्षों पुराने बड़े और हरे-भरे पेड़ों को काटने की तैयारी लगभग हो चुकी है। रोटरी गार्डन के सामने छटाई के नाम पर निर्मम तरीके से डाले काटी गई कि पक्षियों के सैकड़ों घौंसले और उनमें मौजूद अंडे और छोटे बच्चे तड़प तड़प कर मर गए।
2023 की अनुमति दिखा झूठ बोल कटाई
बुधवार को डोंगरे रोड और कॉमर्स कॉलेज क्षेत्र में बिजली कंपनी द्वारा लाइन मेंटेनेंस के नाम पर पेड़ों की छंटाई नहीं, बल्कि कटाई कर दी गई। कई ऐसे पेड़ों को भी आधा काट दिया गया जो बिजली तारों से काफी दूर थे। लोगों का आरोप है कि छंटाई के नाम पर पेड़ों को अपंग बना दिया गया। लेकिन इसी के साथ कुछ लोगों के व्यापार में रोड़ा बन रहे पीपल और नीम के पेड़ों को जड़ सहित हटा दिया गया।
आरोप है कि कटाई के दौरान पहले कर्मचारियों ने झूठ बोला कि बिजली कंपनी के लिए मरम्मत चल रही है। लेकिन बिजली कंपनी ने पल्ला ााड़ा तो सेतु निर्माण विभाग के एक अधिकारी ने तीन साल पुरानी (2023 की) अनुमति दिखाकर कहा कि हरे-भरे पेड़ को कटवाया जा रहा है।
इसपर वहां मौजूद मीडियाकर्मी ने वृक्ष अधिकारी को बुलवाया और काटे जा चुके पेड़ों की लकड़ी जप्त करवाई गई जो लेने के लिए वहां आरा मशीन के कर्मचारी पहले से मौजूद भी थे। हालांकि इसके बावजूद कई पेड़ों की हत्या हो ही गई।
छटाई के नाम पर कटाई, शाम तक रोते रहे पक्षी
रोटरी गार्डन के सामने भी नगर निगम और बिजली कंपनी ने संयुक्त रूप से ऐसी कटाई की कि पेड़ों पर बने पक्षियों के सैकड़ों घोंसले उजड़ गए। बगुलों सहित अनेक पक्षियों के अंडे जमीन पर गिरकर नष्ट हो गए। पर्यावरण संरक्षण के बड़े-बड़े दावे करने वाले जनप्रतिनिधियों ने एक शब्द तक बोलना जरूरी नहीं समझा। इसी तरह शहर में कई इलाकों मे्ं छटाई के नाम पर आधे तने तक पेड़ों की बेरहमी से कटाई की गई है।
गोल्ड कॉम्पलेक्स पर तीन साल बाद चालान नहीं
रतलाम में पिछले पांच वर्षों के दौरान सैकड़ों पेड़ काटे गए, लेकिन किसी बड़े मामले में जिम्मेदारों को सजा मिलना तो दूर, जांच तक पूरी नहीं हो सकी। शहर के चर्चित गोल्ड कॉम्प्लेक्स वृक्ष कटाई प्रकरण में एफआईआर दर्ज हुए तीन साल से अधिक हो चुके हैं, लेकिन अब तक पुलिस न्यायालय में चालान तक पेश नहीं कर पाई है। इतना ही नहीं, पिछले कई वृक्ष कटाई मामलों की जांच भी अधूरी पड़ी है। यही कारण है कि पेड़ काटने वालों के हौसले बुलंद हैं। उन्हें पता है कि कुछ दिनों का शोर होगा और फिर फाइलें धूल खाती रहेंगी।
पक्ष-विपक्ष सब मूक, पूरी परिषद निकली घूमने
आम जनता के लिए ज्यादा चिंताजनक है कि शहर का तापमान लगातार बढ़ रहा है। हरियाली कम हो रही है। पक्षियों के आशियाने उजड़ रहे हैं। लोग विरोध कर रहे हैं। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात जनप्रतिनिधियों की चुप्पी है। महापौर सहित अधिकांश पार्षद, उनके परिजन, उनके मित्र और कुछ पूर्व पार्षद भी एक साथ घूमने निकले हैं, जिसके कारण शहर में लोगों की शिकायतें भी अनसुनी हो रही हैं। लोगों का विरोध है कि विपक्ष भी सड़कों पर दिखाई नहीं दे रहा।
ये विकास नहीं केवल विनाश है...
रतलाम के नागरिक पूछ रहे हैं कि क्या विकास का अर्थ केवल पेड़ काटना रह गया है? क्या सड़कें, पुल और बिजली लाइनें बिना पेड़ों का सफाया किए नहीं बन सकतीं? क्या हर बार पर्यावरण ही सबसे आसान शिकार बनेगा? पिछले 4 सालों से लगातार अंधाधुंध कटाई हो रही है, लेकिन उसकी भरपाई में सुप्रीम कोर्ट के नियम अनुसार भी पौधे लगाकर बड़े नहीं किए गए। 47-48 डिग्री तक तापमान जाने लगा है, इस तरह आम व्यक्ति सांस भी नहीं ले पाएगा।
- प्रकाश लोढ़ा, समाजसेवी एवं व्यावसायी।
पर्यावरण से समझौता बरदाश्त नहीं
आज सवाल सिर्फ 60 पेड़ों का नहीं है। सवाल उस सोच का है जिसमें एक पेड़ को काटना आसान और उसे बचाना मुश्किल माना जाता है। सवाल उन विभागों का है जो हर वर्ष लाखों रुपए पौधारोपण पर खर्च करने का दावा करते हैं, लेकिन दशकों पुराने वृक्षों को बचाने के लिए कोई योजना नहीं बनाते। यही हाल रहा तो आने वाले वर्षों में रतलाम को गर्मी, प्रदूषण और जल संकट की ऐसी कीमत चुकानी पड़ेगी, जिसकी भरपाई करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी संभव नहीं होगी।
- अदिति दवेसर, अधिवक्ता एवं पर्यावरणविद।
न जांच, न कार्रवाई
फिलहाल तो शहर पूछ रहा है—पेड़ कट रहे हैं, घोंसले उजड़ रहे हैं, जांचें ठंडे बस्ते में हैं, जिम्मेदार मौन हैं... आखिर रतलाम की हरियाली का संरक्षक कौन है? सर्वोच्च न्यायालय का आदेश है कि केवल अति आवश्यक होने पर एक के बदले 5 पेड़ लगाकर ही पेड़ काटा जाएगा। रतलाम में नियमों का मखौल लगातार उड़ रहा है।
- श्रेय सेनी, पर्यावरणप्रेमी ।
सेतु निर्माण और बिजली कंपनी के खिलाफ होगी कार्रवाई
इधर नगर निगम वृक्ष अधिकारी अनिल कुमार पारा ने बताया कि पेड़ों की कटाई के संबंध में पंचनामा बनाकर डोंगरे नगर वाले मामले में सेतु निर्माण विभाग को नोटिस दिया गया है। इसके अलावा बिजली कंपनी को एक नोटिस जारी किया जा चुका है, तथा दूसरा भी किया गया है। यदि दोनों विभागों द्वारा भरपाई नहीं की जाती है तो वृक्ष अधिनियम के तहत इनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
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