कलेक्टर के सामने तहसील कार्यालय में किसान ने खुद पर उड़ेला घासलेट
रतलाम कलेक्ट्रेट में जमीन विवाद से परेशान एक किसान ने कलेक्टर के सामने खुद पर घासलेट डालकर आत्मदाह का प्रयास किया। किसान ने 6 साल से सुनवाई नहीं होने का आरोप लगाया, जबकि प्रशासन ने रिकॉर्ड के आधार पर कहा कि अधिकांश जमीन पहले ही विक्रय हो चुकी है और मामले में नियमानुसार कार्रवाई की गई है।
- युवक का आरोप 6 साल से काट रहा चक्कर, प्रशासन ने बताया कि
दस्तावेज अनुसार हो चुकी है पूरी सुनवाई
रतलाम, नामली@newsmpg। कलेक्ट्रेट में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक युवक ने घासलेट डालकर आत्मदाह का प्रयास किया। मौके पर मौजूद कर्मचारियों और अधिकारियों की सतर्कता से उसे रोक लिया गया। मंगलवार को जनसुनवाई में एक किसान द्वारा खुद पर पेट्रोल डालने की घटना हुई थी, जिसके बाद शुक्रवार को यह दूसरा मामला है।
हालांकि मामले में तथ्य सामने आए हैं कि किसान और उसके पिता ने स्वंय ही अपनी जमीन बेच दी है, लेकिन अब जमीन और रुपए खत्म होने पर किसान ने यह घटनाक्रम किया है।
यह है मामला
जानकारी के अनुसार नामली निवासी रमेश कुमावत शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे कलेक्ट्रेट पहुंचा था। वह कलेक्टर से मिलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन बाहर खड़ा रहा। इसी दौरान जब कलेक्टर मिशा सिंह कार्यालय से बाहर निकल रही थीं, तब युवक ने अपने ऊपर घासलेट डाल लिया। स्थिति को गंभीर होते देख कर्मचारियों ने तुरंत उसे पकड़ लिया। घटना के बाद कलेक्टर वापस अपने चैंबर में पहुंचीं और युवक को बुलाकर उसकी समस्या सुनी। बाद में रतलाम ग्रामीण एसडीएम विवेक सोनकर और तहसीलदार आशीष उपाध्याय को तलब कर पूरे मामले की जानकारी ली गई। इसके बाद युवक को स्टेशन रोड थाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया।
6 सालों से काट रहा चक्कर
चर्चा के दौरान रमेश कुमावत ने आरोप लगाया कि उसकी जमीन से जुड़ा मामला वर्षों से लंबित है। उसकी कुछ भूमि को पहले शासकीय घोषित कर दिया गया था, जबकि यह जमीन उसकी थी। इसके अलावा करीब ढाई बीघा जमीन बिजली कंपनी के लिए अधिग्रहित कर ली गई। वह वर्तमान में करीब 10 बीघा जमीन अपने नाम दर्ज कराने की मांग कर रहा है। रमेश का आरोप है कि वह पिछले छह वर्षों से लगातार राजस्व कार्यालयों के चक्कर काट रहा है, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हो रही।
केवल 1 बीघा जमीन थी, वो भी बेची
प्रशासन ने मामले में अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार नामली तहसील में रमेश कुमावत के नाम कुल 0.250 हेक्टेयर भूमि दर्ज थी। इसमें से 0.100 हेक्टेयर भूमि वर्ष 1977-78 में भू-अर्जन अधिकारी के आदेश के तहत तत्कालीन एमपीईबी (बिजली कंपनी) के नाम दर्ज हो चुकी है। प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार शेष 0.150 हेक्टेयर भूमि में से 0.148 हेक्टेयर जमीन रमेश द्वारा विक्रय की जा चुकी है और वर्तमान में केवल 0.002 हेक्टेयर भूमि पर ही रमेश एवं अन्य का नाम दर्ज है। अधिकारियों के मुताबिक रमेश अब जिन जमीनों को लेकर दावा कर रहा है, उनमें से कुछ भूमि की बाकायदा रजिस्ट्री और नामांतरण भी हो चुका है।
दस्तावेजो की जांच के साथ चल रहा मामला
नामली तहसीलदार विवेक सोनकर ने बताया कि मामले में किसान की आवेदन पर उसके दस्तावेज मंगवाकर जांच की जा रही है। भूमि पर अधिकार संबंधी हक देने का अधिकार सिविल न्यायालय को है। ऐसे में किसान को सलाह दी गई थी कि यदि उसे लगता है तो उसे न्यायालय में वाद दायर करना चाहिए। दूसरी ओर रतलाम में लगातार सामने आ रही आत्मदाह की घटनाओं को लेकर हाल ही में मुख्य सचिव अनुराग जैन भी नाराजगी जता चुके हैं। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान उन्होंने अधिकारियों को जनसुनवाई और शिकायतों के समयबद्ध निराकरण के निर्देश दिए थे, ताकि लोग इस तरह के कदम उठाने को मजबूर न हों।