रतलाम सांसदों पर जनता नाराज, 24 घंटे में 1.25 लाख व्यू, 90% ने बताया फेल

रतलाम जिले के तीनों सांसदों को लेकर फेसबुक पोल में जनता की नाराजगी सामने आई है। 24 घंटे में 1.25 लाख व्यू के बीच 90% यूजर्स ने सांसदों के प्रदर्शन को फेल बताया।

रतलाम सांसदों पर जनता नाराज, 24 घंटे में 1.25 लाख व्यू, 90% ने बताया फेल
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रतलाम@newsmpg।   रतलाम जिला देश के चुनिंदा जिलों में शुमार है जहां देश के सबसे बड़े सीधे निर्वाचित पद 'सांसद' के रूप में एक या दो नहीं बल्कि तीन प्रतिनिधि मिले हैं। परंतु तीनों ही सांसदों की कार्यशैली और जनता से जुड़ाव को लेकर जनता की राय बेहद अलहदा है।

इसका खुलासा हुआ है फेसबुक पोस्ट से, जिसमें तीनों सांसदों के कार्यों पर प्रतिक्रिया मांगी गई थी जिसमें 24 घंटे में करीब सवा लाख लोगों ने देखा और प्रतिक्रिया दी है। खास बात यह है कि लगभग 90 प्रतिशत से ज्यादा यूजर्स ने तीनों सांसदों के कार्यशेली और जनता से संपर्क को फेल बताते हुए तीखे कमेंट किए हैं। 

फेसबुक पोल में खुलासा:

दरअसल 11 अप्रैल को रतलाम प्रेस क्लब अध्यक्ष मुकेशुपरी गोस्वामी ने अपनी फेसबुक आईडी पर एक पोस्ट डाली थी। इसमें सवाल किया था कि रतलाम जिले के 3 सांसदों में किसका काम बेहतर है। पोस्ट में रतलाम ­झाबुआ संसदीय क्षेत्र की सांसद अनीता नागर सिंह चौहान, मंदसौर-जावरा संसदीय क्षेत्र के सांसद सुधीर गुप्ता और उज्जैन- आलोट क्षेत्र के सांसद अनिल फिरोजिया के कार्य पर सवाल किए थे। 

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हर वर्ग ने खुलकर बांटी अपनी राय

24 घंटे में सवा लाख से अधिक लोगों ने पोस्ट देखा है और अपनी प्रतिक्रिया दी है, कई यूजर अब भी कमेंट कर रहे हैं। खास बात यह है कि प्रतिक्रिया देने वालों में किसान, युवा, महिलाओं के साथ भाजपा, कांग्रेस और अन्य राजनैतिक पार्टियों से जुड़े कार्यकर्ता तक हैं। लगभग सभी ने अपने क्षेत्र के सांसदों के कार्यो पर तीखी राय रखी है। कुछ ने सीधे ही 0 नंबर दिए हैं, जबकि कुछ ने खुल कर लिखा है कि 3 सालों में चुनाव जीतने के बाद सांसदों का योगदान लगभग शून्य है। हालांकि बहुत कम लोगों ने अपनी पसंद से सांसद गुप्ता, चौहान या फिरोजिया को बाकि दोनों से बेहतर करार भी दिया है। जबकि कुछ एक पार्टी कार्यकर्ताओं ने लिखा है कि काम हो रहा है। 

राष्ट्रवाद और मोदीजी के नाम सिवा कोई उपलब्धि नहीं...

फेसबुक पर आई सैकड़ों प्रतिक्रियाओं में लोगों ने लिखा है कि रतलाम से जुड़े तीनों सांसदों की कोई व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। एक व्यक्ति ने लिखा है कि मोदीजी के नाम पर जीते थे सांसद, इसके अलावा इनकी कोई उपलब्धि न थी, न ये करने की कोशिश कर रहे हैं। अगली बार भी केवल मोदीजी के नाम पर वोट मांगेंगे, क्योंकि खुद कुछ भी नहीं कर रहे। एक यूजर ने लिखा है कि रतलाम खास जिला है जिसमें तीन संसदीय क्षेत्र हैं, लेकिन एक भी सांसद जिले के किसी भी क्षेत्र पर ध्यान नहीं दे रहा।  अन्य यूजर ने तीनों को फर्जी करार दे दिया, जबकि अन्य ने उदासीन, किसी ने कमजोर और फेल तक लिखा है।  एक ने लिखा है कि सांसद चुनाव दर्शन देते हैं उसके बाद पूरे 5 साल गायब रहते हैं, फिर राष्ट्र की बात कहकर वोट मांगते हैं। कई लोगों ने बेहद सख्त लहजे में भी राय रखी है कि सांसदों का जनता से जुड़ाव ही नहीं है। 

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अनीता नागर सिंह का नाम भी याद नहीं...

तीनों सासंदों के मामलो में लोगों ने सांसद अनीता सिंह की सक्रियता सबसे कम बताई है। एक फेसबुक यूजर ने यहां तक लिखा है कि अनीता नागर सिंह चौहान रतलाम सांसद हैं वे भूल ही गए थे। एक ने लिखा है कि रतलाम सांसद अनीता सिंह ने एक साल में रतलाम पर 1 रुपए भी विकास काम के नाम पर खर्च नहीं किए हैं। एक ने लिखा है कि भाजपा के नाम पर वोट करने वाले 80 प्रतिशत मतदाताओं को अनीता नागर सिंह का नाम भी याद नहीं है। एक ने लिखा है कि महिला होकर भी न तो महिला, न युवा, न किसान, न पिछड़ों के लिए कभी सांसद ने कोई पहल नहीं की। 

सांसद गुप्ता की जावरा से है लड़ाई...

मंदसौर सांसद सुधीर गुप्ता को लेकर भी लोगों ने इसी तरह की प्रतिक्रिया दी है। 
एक व्यक्ति ने लिखा है कि सांसद गुप्ता को नोबल पुरस्कार मिलना चाहिए, जावरा विधानसभा से उनकी लड़ाई है। अन्य ने लिखा है कि जावरा क्षेत्र से सांसद महोदय की हमेशा से लड़ाई रही है। कई यूजर ने लिखा है कि चुनाव के बाद से गांव में समस्या और कार्यक्रमों में सांसद के आने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सांसद उन्हें वक्त नहीं देते। 

फिरोजिया जी को देखा ही नहीं...

उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया को लेकर तो लगभग अधिकांश यूजर्स ने यही लिखा है कि उन्हें आलोट, ताल क्षेत्र में देखा ही नहीं गया है। एक यूजर ने लिखा है कि चुनाव के वक्त उनका पोम्पलेट में फोटो देखा था, दोबारा उन्हें देखा ही नहीं। एक यूजर ने फोटो डालकर शमशान की बदहाल स्थिति बयां की है। वहीं अन्य ने लिखा है कि चंबल बांध हो या सड़Þक, पुलिया सभी आवेदनों पर धूल की परत नहीं हट रही है। 

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