आलोट विधानसभा: फेसबुक 'सर्वे' ने बढ़ाया सियासी पारा, 24 घंटे में सवा लाख लोगों की नजर; क्या 'स्थानीय' कार्ड बिगाड़ेगा दिग्गजों का खेल?

रतलाम की आलोट विधानसभा में आगामी चुनावों को लेकर सोशल मीडिया पर सरगर्मी तेज हो गई है। प्रेस क्लब अध्यक्ष मुकेशपुरी गोस्वामी की एक फेसबुक पोस्ट ने 24 घंटे में 1.19 लाख से अधिक लोगों का ध्यान खींचा, जिसमें वर्तमान विधायक डॉ. चिंतामणी मालवीय, जितेंद्र गेहलोत और अजीत बोरासी जैसे दिग्गजों के भविष्य पर जनता ने बेबाक राय दी। सर्वे में सबसे बड़ी बात यह निकलकर आई कि इस बार जनता 'स्थानीय उम्मीदवार' को प्राथमिकता देने के मूड में है, जो बड़े-बड़े सियासी दिग्गजों के समीकरण बिगाड़ सकता है।

आलोट विधानसभा: फेसबुक 'सर्वे' ने बढ़ाया सियासी पारा, 24 घंटे में सवा लाख लोगों की नजर; क्या 'स्थानीय' कार्ड बिगाड़ेगा दिग्गजों का खेल?
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रतलाम@newsmpg आगामी विधानसभा चुनावों की आहट अभी दूर है, लेकिन रतलाम जिले की आलोट विधानसभा में राजनीतिक बिसात बिछना शुरू हो गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर हाल ही में हुए एक सर्वेनुमा पोस्ट ने जिले के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। प्रेस क्लब अध्यक्ष मुकेशपुरी गोस्वामी द्वारा किए गए एक सवाल पर जनता की प्रतिक्रियाओं का ऐसा सैलाब आया कि 24 घंटे के भीतर ही आंकड़ा 1 लाख 19 हजार के पार निकल गया।

'वर्चुअल' जंग: किसके पक्ष में क्या माहौल?

श्री गोस्वामी ने अपनी पोस्ट में क्षेत्र के प्रमुख चेहरों को लेकर जनता की राय मांगी थी। प्रतिक्रियाओं में मतदाताओं का मिला-जुला और रोचक रुझान देखने को मिला:

  • डॉ. चिंतामणी मालवीय (वर्तमान विधायक): समर्थकों का एक बड़ा वर्ग उनके द्वारा किए गए विकास कार्यों के आधार पर उन्हें दोबारा मौका देने की वकालत कर रहा है।

  • जितेंद्र गेहलोत (पूर्व विधायक, भाजपा): पूर्व केंद्रीय मंत्री और कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गेहलोत के पुत्र जितेंद्र गेहलोत के पक्ष में भी बड़ी संख्या में लोगों ने दावेदारी जताई है। उनके कार्यकाल के दौरान हुए कार्यों को जनता आज भी याद कर रही है। एक व्यक्ति ने लिखा है की उन्होंने ७० करोड़ से ज्यादा काम करवाए हैं।

  • अजीत बोरासी (कांग्रेस नेता): पूर्व मंत्री प्रेमचंद गुड्डू के पुत्र और कांग्रेस के युवा चेहरे अजीत बोरासी के समर्थन में भी उनके प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर जमकर बैटिंग की है।

  • मनोज चावला: भाजपा में शामिल हो चुके पूर्व विधायक मनोज चावला के नाम पर भी चर्चाएं गरम हैं।

'स्थानीय' बनाम 'बाहरी': इस बार का सबसे बड़ा मुद्दा

इस पूरी बहस में जो सबसे चौंकाने वाली बात निकलकर सामने आई, वह है 'स्थानीय उम्मीदवार' की मांग। फेसबुक यूजर्स की प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण करें तो एक बड़ा वर्ग इस बात पर अड़ा है कि उम्मीदवार चाहे भाजपा का हो या कांग्रेस का, वह स्थानीय (लोकल) होना चाहिए। 'बाहरी' उम्मीदवारों को लेकर जनता में अंदरूनी असंतोष साफ दिखाई दे रहा है।

"जनता अब केवल चेहरों को नहीं देख रही, बल्कि 'पहुंच' और 'स्थानीयता' को प्राथमिकता दे रही है। कई लोगों ने तो यहाँ तक कह दिया कि अगर पार्टियां पुराने ढर्रे पर चलीं, तो नया चेहरा आकर सबको चौंका सकता है।"

चौंका सकता है कोई 'तीसरा' नाम

कमेंट बॉक्स में सिर्फ दिग्गज ही नहीं, बल्कि कुछ नए नामों की भी चर्चा रही। कुछ जागरूक मतदाताओं ने विकास कार्यों की धीमी गति पर नाराजगी जाहिर करते हुए सभी वर्तमान और पूर्व चेहरों को नकारने की बात भी कही है। लोगों का कहना है कि आलोट की जनता अब केवल वादों पर नहीं, बल्कि धरातल पर दिखने वाले काम पर वोट करेगी।

सोशल मीडिया बना सियासी थर्मामीटर

महज एक दिन में सवा लाख के करीब लोगों तक पहुंचना यह दर्शाता है कि आलोट विधानसभा के लोग राजनीति को लेकर कितने सजग हैं। मुकेशपुरी गोस्वामी की इस पोस्ट ने न केवल नेताओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं, बल्कि राजनीतिक दलों को भी यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि सोशल मीडिया की यह 'पब्लिक' सब जानती है।

बड़ी बातें:

  • 1.19 लाख+ लोगों ने देखी पोस्ट।

  • भाजपा के भीतर डॉ. मालवीय और गेहलोत समर्थकों में होड़।

  • कांग्रेस खेमे से बोरासी के नाम की गूंज।

  • स्थानीयता का मुद्दा बन सकता है हार-जीत का निर्णायक फैक्टर।

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