चंद सेकंड में धू-धू कर जली कार, हाईवे पर मचा हड़कंप! देखें हादसे का LIVE VIDEO
रतलाम जिले के आलोट के समीप रीछा गांव के पास बुधवार दोपहर भीषण गर्मी के बीच चलती कार में अचानक आग लग गई। आग लगने से कार में सवार एक व्यक्ति झुलस गया, जबकि चालक और साथी ने कूदकर जान बचाई। देखते ही देखते कार धू-धू कर जलकर खाक हो गई। विशेषज्ञों के अनुसार तेज गर्मी, शॉर्ट सर्किट, इंजन ओवरहीट और फ्यूल लीकेज जैसी तकनीकी खराबियां हादसे का कारण हो सकती हैं।
- आलोट के समीप रीछा के पहले हुई घटना
रतलाम@newsmpg । रतलाम जिले के आलोट के पास बुधवार दोपहर में गर्मी का भीषण कहर देखने को मिला। यहां गांव रीछा के पास एक चलती कार में आग लग गई। जब तक चालक गति को कम करके बाहर निकलते, तब तक चालक के पास सवार व्यक्ति आग से ाुलस गया। हालांकि चालक और साथी दोनों बाहर निकल आये।
बीच सड़क पर चंद सेकंड में आग ने भीषण रूप ले लिया। चालक ने फोन करके साथियों को सूचना दी। इसके बाद वाहन में सवार साथी को अन्य स्थानयी व्यक्ति अस्पताल लेकर पंहुचा। दूसरी ओर चालक ने बताया कि वह तेज गर्मी में एयर कंडिशनर चालू करके रीछा की ओर आ रहे थे। इसी दौरान करीब 3 बजे उन्हें गाड़ी के अंदर अचानक तेज भभके के साथ गर्माहट आने का एहसास हुआ। कुछ समा कर वाहन की गति धीमी करके उतर पाते, इसके पहले ही बोनट के ऊपर से चिंगारियां निकलने लगी। महज कुछ सेकंड में अंदर डेशबोर्ड के पास से भी चिंगारियां निकल उठी जिनसे साथ बैठा सवार ाुलस भी गया। गनीमत ये रही कि दोनों के उतरते ही कार में भीषण आग लग गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कार पूरी तरह जलकर खाख हो गई।
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क्यों लगती है कार में आग
मैकेनिकल इंजीनियर इंद्रवीर सिसोदिया बताते हैं कि वर्तमान में लगातार दोपहर में तापमान 42 से 45 डिग्री सेल्सियस तक बन रहा है। लगातार कार चलाने पर इंजिन भी गर्म होता है। आमतौर पर आग अचानक नहीं लगती, बल्कि कई छोटी तकनीकी खराबियों और गर्मी के मिलेजुले असर से होती है।
मुख्य कारण ये हो सकते हैं:
1. वायरिंग में शॉर्ट सर्किट:- पुरानी कारों में वायरिंग की प्लास्टिक कोटिंग कमजोर हो जाती है। तेज गर्मी और लगातार इंजन की हीट से तार पिघल सकते हैं या आपस में छू सकते हैं, जिससे स्पार्क होकर आग लग सकती है।
2. इंजन आॅयल या फ्यूल लीकेज:- अगर इंजन आॅयल, पेट्रोल या सीएनजी गैस का रिसाव हो रहा हो और वह गर्म इंजन या एग्जॉस्ट पर गिर जाए, तो तुरंत आग पकड़ सकती है। पुरानी कारों में पाइप और रबर सील जल्दी खराब होती हैं।
3. इंजन का ओवरहीट होना :- लगातार चलाने, खराब कूलेंट, खराब रेडिएटर या फैन की वजह से इंजन बहुत गर्म हो जाता है। अत्यधिक तापमान से वायरिंग, रबर पाइप या आॅयल जल सकता है।
4. लोकल एक्सेसरी या जुगाड़ फिटिंग :- कई लोग पुराने वाहन में लोकल म्यूजिक सिस्टम, अतिरिक्त लाइट, मोबाइल चार्जर, सस्ती वायरिंग या गलत बैटरी फिट करवा लेते हैं। गलत फिटिंग आग का बड़ा कारण बनती है।
5. बैटरी की खराब स्थिति :- पुरानी बैटरी गर्मी में ज्यादा गर्म हो सकती है। टर्मिनल ढीले हों या स्पार्किंग हो रही हो तो आग लगने का खतरा रहता है।
6. बोनट में जमा सूखी घास या प्लास्टिक :- कभी-कभी इंजन के नीचे सूखे पत्ते, कपड़ा या प्लास्टिक फंस जाता है।
कौन से संकेत खतरे का इशारा
जलने जैसी बदबू आना, बोनट से धुआं निकलना, वायरिंग पिघलने की गंध, इंजन तापमान बहुत बढ़ना, बार-बार फ्यूज उड़ना, इंजन भारी लगना।
बचाव कैसे करें?
हर 6 महीने में वायरिंग और फ्यूल पाइप चेक करवाएं, कूलेंट हमेशा सही रखें, लोकल इलेक्ट्रिक फिटिंग से बचें, कार में छोटा फायर एक्सटिंग्विशर रखें, लंबी यात्रा में बीच-बीच में 15-15 मिनट का ब्रेक दें, इंजन ओवरहीट होते ही तुरंत गाड़ी रोक दें।