3 मौतों के बाद भी नहीं चेता विभाग, यहां झूलते तारों के साये में बोवनी से बच्चे तक

हतनारा में बिजली के तारों से ताजिया छूने पर तीन युवकों की मौत के बाद भी जिले में झूलते बिजली के तार और जर्जर खंभों की समस्या बरकरार है। खेतों से लेकर शहर की कॉलोनियों तक हाईटेंशन लाइनें खतरा बनी हुई हैं। किसानों, ग्रामीणों और रहवासियों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद बिजली विभाग स्थायी समाधान नहीं कर रहा, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

3 मौतों के बाद भी नहीं चेता विभाग, यहां झूलते तारों के साये में बोवनी से बच्चे तक
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रतलाम @newsmpg।    हतनारा में ताजिया बिजली के तारों से छूने के कारण तीन युवकों की दर्दनाक मौत को अभी चार-पांच दिन भी नहीं बीते हैं। इससे पहले भी पिछले एक वर्ष में जिले में करंट लगने से दो दर्जन से अधिक किसान और ग्रामीण अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके बावजूद बिजली विभाग की व्यवस्था में कोई सुधार नजर नहीं आ रहा। शहर हो या गांव, खेत हों या कॉलोनियां, हर जगह झूलते बिजली के तार और जर्जर खंभे किसी बड़े हादसे का इंतजार करते दिखाई दे रहे हैं।

इन दिनों जिलेभर में खरीफ फसल की बोवनी का काम चल रहा है। हजारों किसान ट्रैक्टर और कृषि यंत्रों के साथ खेतों में दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। लेकिन खेती से ज्यादा उन्हें सिर के ऊपर लटक रहे हाईटेंशन तारों का डर सता रहा है। जिले के अधिकांश खेतों में बिजली की लाइनें इतनी नीचे आ चुकी हैं कि किसी भी समय ट्रैक्टर, सीड ड्रिल या अन्य कृषि वाहन उनकी चपेट में आ सकते हैं। जरा-सी चूक किसी परिवार की जिंदगी हमेशा के लिए बदल सकती है।

लकड़ी लेकर तार ऊंचे कर खड़ा किसान, वीडियो वायरल

स्थिति कितनी भयावह है, इसका उदाहरण करमदी गांव में देखने को मिला। यहां किसान को मजबूरी में लकड़ी का अस्थायी ढांचा बनाकर हाईटेंशन लाइन को ऊपर उठाना पड़ा, ताकि उसके नीचे से ट्रैक्टर निकालकर बोवनी की जा सके। जिस लाइन में करंट दौड़ रहा था, उसके नीचे किसान अपनी जान जोखिम में डालकर खेती करने को मजबूर था। यह सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि जिले के लगभग 80 प्रतिशत खेतों में कमोबेश ऐसे ही हालात बने हुए हैं।

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खेत ही नहीं घरों में भी यही खतरा 

खतरा सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं है। शहर की कई कॉलोनियां भी बिजली विभाग की लापरवाही का खामियाजा भुगत रही हैं। वेद व्यास कॉलोनी में श्रीकृष्ण धर्मशाला की लाइन के पास स्थित बगीचे के समीप बिजली का खंभा गिरने की स्थिति में पहुंच चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद बिजली कंपनी का अमला मौके पर नहीं पहुंचा। यहां बिजली की लाइनें मकानों के छज्जों को छू रही हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। 

यहां भी हाईटेंशन का टेंशन

शास्त्री नगर में स्थिति और भी चिंताजनक है। यहां बगीचे के पास से हाईटेंशन लाइन सीधे घरों से सटकर गुजर रही है। रहवासी वर्षों से इन लाइनों को सुरक्षित करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। मुख्य बाजार क्षेत्र में भी कई स्थानों पर बिजली के तार सामान्य ऊंचाई से काफी नीचे झूल रहे हैं। यहां हर दिन हजारों लोगों की आवाजाही रहती है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे है।

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दशकों से नहीं ली जा रही तारों की सुध

बिजली विभाग के पुराने कर्मचारियों के अनुसार समस्या नई नहीं है, बल्कि वर्षों से लगातार बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि लाइनों का मेंटेनेंस तो होता है, लेकिन यह सिर्फ उन पेड़ों की टहनियां काटने तक सीमित रह गया है, जो बिजली के तारों को छू रही होती हैं। कई दशकों से झूलती लाइनों को दोबारा खींचकर उनकी ऊंचाई और तनाव (टेंशन) ठीक करने का काम नहीं किया गया।

निजी इंटरनेट और केबल का बो­ा भी

समय के साथ बिजली के इन्हीं खंभों पर निजी केबल आॅपरेटरों, टेलीफोन और इंटरनेट कंपनियों के तारों का अतिरिक्त भार भी डाल दिया गया। नतीजा यह हुआ कि बिजली के तार पहले से अधिक नीचे झूलने लगे। मरम्मत के दौरान भी इन्हें व्यवस्थित करने या दोबारा कसने का प्रयास नहीं किया जाता। वहीं टूटे, झुके और जर्जर खंभों को भी बदलने में गंभीरता नहीं दिखाई जा रही। यही वजह है कि जिले में हर साल करंट से होने वाले हादसों की संख्या कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है।

सोशल मीडिया से सड़क तक सवाल

हतनारा की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर बिजली विभाग किसी बड़े हादसे से पहले क्यों नहीं जागता? जब तक जान नहीं जाती, तब तक न झूलते तारों पर ध्यान दिया जाता है और न ही जर्जर खंभों पर। सवाल यह भी है कि क्या हर हादसे के बाद सिर्फ जांच और मुआवजे की घोषणा होगी, या फिर जिलेभर में झूलती बिजली लाइनों और खतरनाक खंभों को दुरुस्त करने के लिए भी कोई व्यापक अभियान चलाया जाएगा? क्योंकि मौजूदा हालात बता रहे हैं कि यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो अगला हादसा कहीं भी और कभी भी हो सकता है।