रावतभाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट और रतलाम मेडिकल कॉलेज के बीच एमओयू , 30 किमी के दायरे में रहने वाली आबादी पर होगा वैज्ञानिक अध्ययन
रावतभाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट (आरआर साइट) के आसपास रहने वाली आबादी के स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े वैज्ञानिक आंकड़े जुटाने की जिम्मेदारी अब डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, रतलाम को मिली है। राजस्थान स्थित रावतभाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट और मेडिकल कॉलेज के बीच करीब 90 लाख रुपए की अनुसंधान परियोजना के लिए एमओयू हुआ है
रतलाम।@Newsmpg रावतभाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट (आरआर साइट) के आसपास रहने वाली आबादी के स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े वैज्ञानिक आंकड़े जुटाने की जिम्मेदारी अब डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, रतलाम को मिली है। राजस्थान स्थित रावतभाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट और मेडिकल कॉलेज के बीच करीब 90 लाख रुपए की अनुसंधान परियोजना के लिए एमओयू हुआ है। इसके तहत परमाणु ऊर्जा संयंत्र के 30 किलोमीटर के दायरे में रहने वाली आबादी का व्यापक डाइटरी सर्वे किया जाएगा।
रावतभाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट की ओर से मध्यप्रदेश और राजस्थान के 10 से अधिक चिकित्सा महाविद्यालयों से अनुसंधान प्रस्ताव आमंत्रित किए गए थे। चयन प्रक्रिया के बाद रतलाम मेडिकल कॉलेज का चयन किया गया। इसे कॉलेज की अनुसंधान क्षमता और पूर्व में किए गए कार्यों की उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।
एमओयू पर आरआर साइट के साइट डायरेक्टर डीएस राव की उपस्थिति में मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. अनिता मूथा और आरआर साइट की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. निधि जैन ने हस्ताक्षर किए। इस दौरान कम्यूनिटी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. एसके लिखार, डॉ. ध्रुवेंद्र पांडे और डॉ. लोकेन्द्र सिंह कोट भी मौजूद रहे।
30 किलोमीटर के दायरे में होगा सर्वे
परियोजना के तहत रावतभाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट से 30 किलोमीटर के दायरे में आने वाले क्षेत्रों की आबादी का सर्वे किया जाएगा। इसमें राजस्थान के चित्तौड़गढ़ और कोटा तथा मध्यप्रदेश के मंदसौर और नीमच जिले के संबंधित क्षेत्र शामिल होंगे।
अध्ययन में लोगों के भोजन की आदतों, पोषण स्तर और विभिन्न खाद्य पदार्थों के दैनिक सेवन से जुड़े आंकड़े जुटाए जाएंगे। इन आंकड़ों के आधार पर संयंत्र के सामान्य संचालन अथवा विशेष परिस्थितियों में संभावित रेडियोलॉजिकल प्रभावों के आकलन के लिए वैज्ञानिक आधार तैयार किया जाएगा।
24 घंटे के भोजन का लिया जाएगा पूरा हिसाब
सर्वे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित 24-घंटे की डाइटरी रिकॉल पद्धति का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें परिवारों से पिछले 24 घंटे में किए गए भोजन और पेय पदार्थों के सेवन की विस्तृत जानकारी ली जाएगी।
इसमें पेयजल, दूध एवं दुग्ध उत्पाद, अनाज, दालें, फल, सब्जियां और अन्य खाद्य पदार्थों के सेवन का विवरण शामिल होगा। अध्ययन में शिशुओं से लेकर वयस्कों तक विभिन्न आयु वर्गों को शामिल किया जाएगा, ताकि क्षेत्र की आबादी का प्रतिनिधिक पोषण संबंधी डेटा तैयार हो सके।
छात्रों को मिलेगा राष्ट्रीय स्तर के शोध का अनुभव
परियोजना में मेडिकल कॉलेज के कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सक, शोधकर्ता और विद्यार्थी भी शामिल होंगे। फील्ड सर्वे, डेटा संकलन, सांख्यिकीय विश्लेषण और शोध प्रकाशन की प्रक्रिया में विद्यार्थियों को काम करने का अवसर मिलेगा। इससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर की अनुसंधान परियोजना में व्यावहारिक अनुभव मिलेगा।
बांसवाड़ा न्यूक्लियर साइट का काम कर चुका है कॉलेज
रतलाम मेडिकल कॉलेज इससे पहले भी परमाणु ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी अनुसंधान परियोजना पर काम कर चुका है। वर्ष 2024 में बांसवाड़ा न्यूक्लियर साइट के लिए कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग द्वारा इसी प्रकार की राष्ट्रीय महत्व की परियोजना का सफल संचालन किया गया था। इसी पूर्व अनुभव और परियोजना के सफल क्रियान्वयन को देखते हुए रावतभाटा परियोजना के लिए भी मेडिकल कॉलेज का चयन किया गया है।
भविष्य के स्वास्थ्य और पर्यावरणीय अध्ययन के लिए बनेगा आधार
अध्ययन से रावतभाटा परमाणु ऊर्जा संयंत्र के आसपास रहने वाली आबादी के पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े आधारभूत आंकड़ों का वैज्ञानिक दस्तावेज तैयार होगा। ये आंकड़े भविष्य में जनस्वास्थ्य नीतियों, पोषण कार्यक्रमों, पर्यावरणीय स्वास्थ्य अनुसंधान और संभावित रेडियोलॉजिकल प्रभावों के आकलन में उपयोगी हो सकते हैं।
डीन डॉ. अनिता मूथा ने एमओयू को मेडिकल कॉलेज के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं के साथ इस तरह का अनुसंधान सहयोग चिकित्सा शिक्षा और शोध को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा कि परियोजना के माध्यम से विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को भी बड़े स्तर पर काम करने का अवसर मिलेगा।
एमओयू के बाद मेडिकल कॉलेज परिवार में हर्ष का माहौल है। संकाय सदस्यों और कर्मचारियों ने डीन डॉ. अनिता मूथा, कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग और परियोजना से जुड़े सदस्यों को बधाई दी।