महंगाई पर हल्ला बोल: बैलगाड़ियों पर चढ़कर पहुंचे कांग्रेसी, पुलिस ने छोड़ी पानी की बौछार
रतलाम में महंगाई, किसानों की समस्याओं और बढ़ती ईंधन कीमतों के विरोध में कांग्रेस ने जनआक्रोश किसान रैली निकाली। बैलगाड़ियों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में पहुंचे कार्यकर्ताओं को कलेक्ट्रेट से पहले पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रोक दिया। प्रदर्शन के दौरान वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया, जबकि शहर के कई प्रमुख मार्ग बंद रहने से आम नागरिकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
रतलाम @newsmpg। बढ़ती महंगाई, किसानों की समस्याओं और पेट्रोल-डीजल सहित रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं के लगातार बढ़ते दामों के विरोध में सोमवार को रतलाम में कांग्रेस ने जनआक्रोश किसान रैली निकालकर जोरदार प्रदर्शन किया। लंबे समय बाद कांग्रेस संगठन पूरी तरह एकजुट नजर आया। जिलेभर से बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी, कार्यकर्ता और किसान इस आंदोलन में शामिल हुए।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक हर्षविजय गेहलोत के नेतृत्व में सैलाना सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान बैलगाड़ियों में सवार होकर रतलाम पहुंचे। गेहलोत सहित पदाधिकारी खुली जीप में सवार थे।
रास्तेभर कार्यकर्ता केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे। रैली सैलाना बस स्टैंड मंडी से चालू हुई। धानमंडी पंहुचते ही कार्यकर्ताओं ने देखा कि बेरीकेटिंग करके रास्ते रोक दिए गए थे। लेकिन कार्यकर्ता पहले से ली गई अनुमति के अनुसार बेरीकेट हटाकर गणेश देवरी, डालूमोदी बाजार होते हुए कालेज रोड होते हुए छत्रिपुल पंहुचे। लेकिन यहां कलेक्ट्रेट की ओर जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर बैरिकेड्स लगाए गए थे ताकि प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट तक नहीं पहुंच सकें।
रास्ता बंद किया तो सड़क पर शुरु हुआ प्रदर्शन
कांग्रेस कार्यकर्ता निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचकर राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपना चाहते थे, लेकिन प्रशासन बैरिकेडिंग कर सभी रास्तों को बंद कर दिया। इसके बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकतार्ओं ने छत्रीपुल रोड पर प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान सैलाना नप अध्यक्ष लक्की शुक्ला, जिपं सदस्य और किसान नेता डीपी धाकड़, वरिष्ठ नेता वीरेंद्र सिंह सोलंकी, यास्मीन शेरानी, यूसुफ कड़पा, शहर कांग्रेस अध्यक्ष शांतिलाल वर्मा, राजीव रावत, मंसूरअली पटौदी, संजय चौहान सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी, कार्यकर्ता और किसान मौजूद रहे। कार्यकतार्ओं ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए और अपनी मांगों को लेकर जमकर विरोध जताया।
गूंगी-बहरी सरकार, चंदा से चांदी तक कर रही चोरी
प्रदर्शन के दौरान जिलाध्यक्ष गेहलोत ने कहा कि- भाजपा सरकारी गूंगी, बहरी है जो जनता की तकलीफ न सुनती है, न पुकार पर बोलती है। कच्चे तेल की कीमत कम होने पर भी आम जनता को पेट्रोल डीजल महंगा ही मिलेगा। किसानों को खेती के लिए बीज, खाद, कीटनाशक और अन्य कृषि सामग्री महंगे दामों पर खरीदना पड़ रही है। इसके बावजूद सरकार खुद की वाहवाही कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर जैसे आस्था के केंद्र से चंदा से लेकर चांदी तक चोरी हो रही है। खुले आम जिले में नशा और अवैध दारू बिक रही है। सरकार केवल माफियाओं का साथ दे रही है। पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया ने कहा कि कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश और केंद्र सरकार जनता की आवाज सुनने के बजाय उसे दबाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को रखने और ज्ञापन सौंपने तक की अनुमति नहीं दी जा रही है।
पुलिस ने छोड़ा वाटर कैनन, नहीं हटे कांग्रेसी
कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता बैरिकेड्स के पास पहुंचकर आगे निकलने का प्रयास करने लगे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने मौके पर खड़ी फायर ब्रिगेड से पानी की तेज धार चलवाई। पानी की बौछारों के बीच भी कांग्रेस कार्यकर्ता पीछे हटने को तैयार नहीं हुए और काफी देर तक वहीं डटे रहे।
इस दौरान मौके पर मौजूद सीएसपी सत्येंद्र घनघौरिया ने बताया कि मौके पर ही ज्ञापन दे सकते हंै। लेकिन कांग्रेसी कलेक्ट्रेट जाकर कलेक्टर से मिलने की मांग पर अड़े रहे। काफी देर चले हंगामे के बाद वे बिना ज्ञापन दिए ही लौट गए। उ्नहोंने कहा कि प्रशासन द्वारा रास्ते बंद कर दिए गए, जिससे साफ है कि सरकार जनता की पीड़ा सुनना ही नहीं चाहती।
बंद रास्तों ने बढ़ाई आमजन की परेशानी
कांग्रेस की जनआक्रोश किसान रैली के दौरान प्रदर्शन से अधिक चर्चा शहरभर में की गई व्यापक बैरिकेडिंग और बंद किए गए मार्गों की रही। इसका खामियाजा हजारों आम नागरिकों को भुगतना पड़ा। लोगों का कहना था कि आंदोलन तो कुछ समय का था, लेकिन पूरे शहर की यातायात व्यवस्था प्रभावित होने से आमजन घंटों तक परेशान होते रहे।
बिना प्लानिंग बंद ने इस तरह किया हैरान :-
1. छत्रीपुल, कोर्ट चौराहा, गीता मंदिर मार्ग और कान्वेंट तिराहे तक जगह-जगह बैरिकेडिंग कर रास्ते बंद कर दिए गए। इसके कारण पूरे क्षेत्र में वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और कई स्थानों पर जाम की स्थिति बनी रही।
2. सबसे अधिक परेशानी उस समय हुई जब सेंट जोसेफ कान्वेंट स्कूल की छुट्टी का समय हुआ। स्कूल से निकलने वाले हजारों बच्चों और उन्हें लेने पहुंचे अभिभावकों को बंद रास्तों के कारण भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई अभिभावकों को अपने बच्चों तक पहुंचने के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़ा, जबकि आॅटो, मैजिक और निजी वाहनों को जगह-जगह रोक दिए जाने से अफरा-तफरी जैसे हालात बन गए।
3. कई स्थानों पर बच्चों और अभिभावकों के बीच एक-दूसरे को खोजने की स्थिति बनी रही और सड़क पर काफी देर तक चीख-पुकार का माहौल देखने को मिला।
4. यातायात व्यवस्था प्रभावित होने का असर न्यायालय परिसर तक भी दिखाई दिया। कोर्ट के चारों ओर के रास्ते बंद होने से वकीलों, पक्षकारों और अन्य लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी।
5. कई लोगों को छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ पैदल लंबी दूरी तय करनी पड़ी। बंद मार्गों के कारण न्यायालय पहुंचने और वहां से निकलने में लोगों को काफी समय लगा।
6. अन्य मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ने से लोकेन्द्र टॉकीज चौराहे पर भी वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। इसका असर जिला अस्पताल आने-जाने वाले मरीजों और उनके परिजनों पर भी पड़ा। कई एम्बुलेंस और निजी वाहन जाम में फंसे नजर आए।
7. पुराने कलेक्ट्रेट से कोर्ट की ओर जाने वाले एकमात्र खुले मार्ग पर लगभग दो घंटे तक वाहन रेंगते रहे और लोगों को गंतव्य तक पहुंचने में सामान्य से कहीं अधिक समय लगा।