जावरा नगर पालिका अध्यक्ष को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा अंतरिम आदेश, राजनैतिक हलचल हुई तेज 

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने जावरा नगर परिषद अध्यक्ष से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी करते हुए उनकी वित्तीय शक्तियों पर रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा की एकलपीठ ने पारित किया।

जावरा नगर पालिका अध्यक्ष को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा अंतरिम आदेश, राजनैतिक हलचल हुई तेज 


इंदौर/रतलाम।  मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने जावरा नगर पालिका अध्यक्ष से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी करते हुए उनकी वित्तीय शक्तियों पर रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा की एकलपीठ ने पारित किया।
 मामला श्रीमती रुक्मण धाकड़ बनाम मध्यप्रदेश शासन व अन्य के रूप में प्रस्तुत हुआ था। जिसमें  विधिवत रूप से अध्यक्ष घोषित करने की अधिसूचना जारी नहीं होने का हवाला दिया गया था । याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अमित राय ने पैरवी की, जबकि शासन की ओर से सरकारी अधिवक्ता दृष्टि रावल उपस्थित रहीं।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने तर्क दिया कि इसी तरह का एक मामला पूर्व में भी विचाराधीन है, जिसमें अंतरिम राहत प्रदान की जा चुकी है। इस आधार पर न्यायालय ने वर्तमान याचिका को सुनवाई योग्य मानते हुए प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नोटिस की प्रक्रिया सात कायर् दिवस के भीतर पूर्ण की जाए, अन्यथा याचिका स्वत: निरस्त मानी जाएगी।

स्थानीय स्तर पर राजनीतिक हलचल तेज
कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा है कि प्रतिवादी क्रमांक 5, जो कि जावरा नगर परिषद के अध्यक्ष पद से संबंधित हैं, वे अगली सुनवाई तक अपनी वित्तीय शक्तियों का उपयोग नहीं करेंगे। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि उन्हें विधिवत रूप से अध्यक्ष घोषित करने की अधिसूचना जारी नहीं होती है, तो यह रोक प्रभावी बनी रहेगी।
न्यायालय ने मामले को पूर्व से लंबित समान प्रकृति के प्रकरण के साथ जोड़ते हुए अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। साथ ही प्रतिवादियों को छह सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस अंतरिम आदेश के बाद जावरा नगर परिषद के प्रशासनिक और वित्तीय निर्णयों पर अस्थायी प्रभाव पड़ने की संभावना है, जिससे स्थानीय स्तर पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।


आगे क्या होगा
नगर पालिका अध्यक्ष अनम युसुफ कड़पा ने कहा कि ऐसा मामला पूरे मध्यप्रदेश में है जहां पार्षद से अध्यक्ष बनने के लिए अलग -अलग नोटिफिकेशन जारी नही किए गए है। कोर्ट इस मामले की पूर्व से कोई जानकारी भी नहीं थी। शासन स्तर का मामला है इसके साथ ही सभी कानूनी पहलूओ पर जानकारों से राय लेकर आगे कदम उठाएगें। फिलहाल वित्तीय अधिकारों पर न्यायालय ने रोक लगाई है। 
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