रात 2:30 बजे बाजना क्षेत्र में बड़ी हलचल, एसडीएम की ना के बाद भी टंट्या मामा की प्रतिमा स्थापित, सत्ता और सिस्टम की भिड़ंत

राजापुरा गांव में टंटिया मामा की प्रतिमा स्थापना को लेकर प्रशासन और विधायक कमलेश्वर डोडियार आमने-सामने! ग्रामसभा के प्रस्ताव पर आपत्ति के बाद विधायक ने आधी रात करीब 2:30 बजे प्रतिमा स्थापित कर दी।

रात 2:30 बजे बाजना क्षेत्र में बड़ी हलचल, एसडीएम की ना के बाद भी टंट्या मामा की प्रतिमा स्थापित, सत्ता और सिस्टम की भिड़ंत
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रतलाम @newmpg....बाजना अंचल का राजापुरा गांव में मंगलवार रात ढाई बजे रात एक ऐसी कार्रवाई हुई, जिसने पूरे इलाके में नई राजनीति बवाल मचा दिया है। प्रशासन की आपत्ति के बावजूद सैलाना विधायक और उनके कुछ समर्थकों ने जनजातीय नायक टंटिया मामा की प्रतिमा को ग्राम राजपुरा माताजी में स्थापित कर दिया है। क्षेत्र में एक बार फिर टकराव की स्थिति बन सकती है। 

दरअसल राजपुरा माताजी में कुछ वक्त से टंटिया मामा की प्रतिमा स्थापित करने की बात कुछ ग्रामीणों ने की थी। स्थापना के लिए ग्रामसभा का प्रस्ताव भी पारित हो गया। इसे अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर ग्राम के नेता सैलाना एसडीएम के पास पहुंचे। जवाब में प्रशासन ने पुरातत्व विभाग, राजस्व आदि से एनओसी लाने और उसके बाद ही प्रतिमा स्थल तय होने की बात कह दी। यहीं से मामला शांत प्रक्रिया से निकलकर टकराव के मोड में चला गया। 

रात 2:30 बजे ‘मूवमेंट’, लग गई प्रतिमा

जब यह बात सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार तक पहुंची, तो घटनाक्रम ने अचानक एक्शन मोड ले लिया। रात करीब दो बजे राजस्थान के तलवाड़ा (बांसवाड़ा) से टंटिया मामा की प्रतिमा रवाना हुई और ढाई बजे राजापुरा गांव में स्थापना भी कर दी गई। पूरी कार्रवाई इतनी तेज और अप्रत्याशित रही कि तड़के तक प्रशासन को जानकारी भी नहीं लगी। 

अब 25 को अनावरण का न्यौता 

प्रतिमा स्थापना के बाद विधायक डोडियार ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्र में पेसा कानून का एक-एक अक्षर लागू होगा और ग्रामीणों को जागरूक कर बाहरी या राजनीतिक दबाव वाले हस्तक्षेप को खत्म किया जाएगा। साथ ही उन्होंने 25 जनवरी को प्रतिमा अनावरण और जनजागृति कार्यक्रम की घोषणा कर दी—जिसे कई लोग आने वाले टकराव की ओपन चैलेंज डेट मान रहे हैं। उन्होंने समर्थकों से आने की अपील भी सोशल मीडिया पर की।

इंडस्ट्रियल एरिया और तनातनी

खास बात यह है कि इस पूरे इलाके में मेगा इंडस्ट्रियल एरिया प्रस्तावित होने के बाद से ही ग्रामसभा, स्थानीय नेतृत्व और प्रशासन के बीच लगातार खींचतान चल रही है। टंटिया मामा की प्रतिमा उसी लंबी तनातनी की ताज़ा कड़ी मानी जा रही है। यह भी उल्लेखनीय की यहां से प्रसिद्ध शक्तिस्थल पर जिले ही नहीं बल्कि आसपास के भक्तों की भी आस्था है। परंतु कुछ वर्षों में विवाद और अपराध बढे हैं। इसे में अब अन्य लोग प्रशासन के अगले रुख का इंतजार करेंगे।