हरथल में इंदौर जैसी आफ़त का डर! दूषित पानी से कई बीमार, प्रशासन अलर्ट !

रतलाम जिले के हरथली गांव में दूषित पानी पीने से कई लोग बीमार पड़ गए। एक हैंडपंप सील, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर। इंदौर जैसी स्थिति का डर।

हरथल में इंदौर जैसी आफ़त का डर! दूषित पानी से कई बीमार, प्रशासन अलर्ट !
Bad health due to contaminated water in a village of Ratlam

रतलाम@newsmpg। जिले के गांव हरथल में गंदे पानी के कारण एक दर्जन से ज्यादा लोग बीमार पड़ गये हैं। घटना के सामने आते ही कलेक्टर के आदेश पर विभाग हरकत में आये हैं। 

प्रारंभिक रूप से पता चला है कि सभी बीमार एक हैंडपंप का पानी पी रहे थे, जो काई युक्त पाया गया। पंप सील कर जांच शुरू कर दी गई, दूसरी ओर बीमारों का इलाज भी चल रहा है। 

जानकारी के अनुसार गाँव में अचानक करीब एक दर्जन लोगों को दस्त और करीब आधा दर्जन से ज्यादा को साथ में उल्टी जैसी समस्या होने लगी। स्वास्थ्य केंद्र पर इतने मरीजों के पहुंचने पर स्वास्थ्य विभाग ने सूचना मुख्यालय पर दी। 

पानी पर गया शक

शुरुआत में इसे खाने के कारण माना गया, लेकिन इलाज में सामने आया कि सभी ने खाना अलग खाया लेकिन सभी एक ही हैंडपंप से पानी पीते हैं। इसपर प्रशासन तुरंत अलर्ट मोड पर आ गया। 

काई युक्त मिला पानी

स्वास्थ्य टीम, ग्राम पंचायत ने जब गांव के हैंडपंप का परीक्षण किया, तो सामने आया कि पानी में काई और गंदगी प्रतीत हो रही है। इसपर जन संसाधन विभाग को भी सूचित किया गया। पानी के सैंपल लिये गये तो स्पष्ट हुआ कि सीधे तौर पर संक्रमण फैलाने की वजह बन सकती है।

291 का सर्वे, 12 मरीज चिन्हित

कलेक्टर को जानकारी मिलने पर उन्होंने तत्काल कार्यवाही के आदेश दिये। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 45 घरों के 291 ग्रामीणों का सर्वे किया, जिसमें 6 उल्टी-दस्त, 6 सामान्य दस्त के मरीज पाए गए।सभी का उपचार हो रहा है। 

इंदौर की याद ने बढ़ाई चिंता

हरथल में हालात इसलिए भी ज्यादा गंभीर माने जा रहे हैं क्योंकि कुछ समय पहले इंदौर में दूषित पानी से सैकड़ों लोग बीमार हुए और कई मौतें भी हुई थीं। उसी अनुभव के कारण आम लोगों को इस मामले को चिंता बढ़ गयी है।

पानी पर रोक और टैंकर की व्यवस्था

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशसन ने हैंडपंप से पानी का सैंपल लेकर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को भेजा गया। हैंडपंप का पानी पीने पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। टैंकर से सुरक्षित पानी की व्यवस्था की जा रही है। गांव में 7 दिन तक स्वास्थ्य निगरानी के निर्देश दिये गये हैं।