रतलाम नगर निगम में कुत्तों की नसबंदी के नाम पर घोटाला  - चार साल से चल रहा भ्रष्टाचार का सिलसिला, लोकायुक्त मुख्यालय पहुंची जांच रिपोर्ट

रतलाम नगर निगम में कुत्तों के बधियाकरण के नाम पर करोड़ों रुपए के कथित घोटाले का मामला लोकायुक्त जांच में सामने आया है। वर्ष 2022 से 2025 के बीच वास्तविक सर्जरी की तुलना में भारी भुगतान और कम दरों पर बधियाकरण के दावों ने निगम अधिकारियों और निजी फर्मों की भूमिका को संदेह के घेरे में ला दिया है। जांच प्रतिवेदन भोपाल लोकायुक्त मुख्यालय भेजा जा चुका है।

रतलाम नगर निगम में कुत्तों की नसबंदी के नाम पर घोटाला  - चार साल से चल रहा भ्रष्टाचार का सिलसिला, लोकायुक्त मुख्यालय पहुंची जांच रिपोर्ट
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- करोड़ों खर्च लेकिन सिर्फ 2200 कुत्तों की हो पाई सर्जरी, 3 हजार से ज्यादा बाकि 

रतलाम@newsmpg।  नगर निगम में कुत्तों के बधियाकरण के नाम पर करोड़ों रुपए के कथित घोटाले का मामला निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। लोकायुक्त जांच में सामने आया है कि वर्ष 2022 से 2025 तक लगातार चार वर्षों तक बिना समुचित निगरानी और सत्यापन के भुगतान किए जाते रहे। कांग्रेस पार्षद भावना हितेश पैमाल की शिकायत के बाद हुई जांच में अब इस पूरे मामले का विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर लोकायुक्त भोपाल मुख्यालय भेज दिया गया है।
जांच प्रतिवेदन के अनुसार वर्ष 2022 से 2024 के बीच 1 करोड़ 73 लाख 78 हजार 4 रुपए के भुगतान में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। इसमें निगम के नोडल अधिकारी सहित जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है। सूत्रों के मुताबिक जल्द ही कुत्ता बधियाकरण के नाम पर राशि की बंदरबांट करने वालों पर एफआईआर दर्ज होने की संभावना है।

दो फर्म को हआ सवा दो करोड़ का भुगतान

इसी को लेकर कांग्रेस पार्षद भावना हितेश पैमाल ने लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई थी। लोकायुक्त जांच में सामने आया कि संबंधित दो फर्मों द्वारा 24,114 कुत्तों के बधियाकरण का दावा किया गया, जबकि भुगतान की दरें और वास्तविक खर्च में बड़ा अंतर पाया गया। जांच एजेंसी को आशंका है कि अधिकारियों और निजी फर्मों के बीच आपसी मिलीभगत से भुगतान किया गया।जानकारी के अनुसार रतलाम नगर निगम द्वारा 2022 से मई 2025 तक कुल 33,630 कुत्तों के बधियाकरण का दावा करते हुए दो निजी फर्मों को करीब 2.29 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े स्तर पर बधियाकरण के बावजूद शहर में डॉग संख्या में कमी नहीं आने पर पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए।

बचाव में जुटा निगम, लोकायुक्त ने की तरफा कार्रवाई

भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मामले में भी रतलाम नगर निगम की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। संभागायुक्त द्वारा निगम आयुक्त से स्पष्ट अभिमत मांगे जाने के बावजूद एसआईआर का हवाला देकर रिपोर्ट समय पर नहीं भेजी गई। मजबूरी में लोकायुक्त को बिना निगम आयुक्त की सहमति के ही जांच प्रतिवेदन भोपाल मुख्यालय भेजना पड़ा।

कम दरों पर कैसे हुआ बधियाकरण?

जांच में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। वर्ष 2022 से 2024 के बीच चार बार बधियाकरण कार्य कराया गया, जिसमें तीन बार 786 रुपए और एक बार 636 रुपए प्रति कुत्ता भुगतान किया गया। जबकि विशेषज्ञों के अनुसार एक सामान्य बधियाकरण किट की कीमत ही करीब 845 रुपए होती है और सरकारी गाइडलाइन के अनुसार पूरा खर्च लगभग 1600 रुपए प्रति कुत्ता आता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इतनी कम राशि में बधियाकरण कैसे संभव हुआ, जबकि इसमें कुत्तों को पकड़ने, सर्जरी, दवाइयां, देखभाल और डॉक्टर की फीस भी शामिल होती है। लोकायुक्त अब यह भी जांच कर रहा है कि भुगतान से पहले वेरिफिकेशन किया गया या केवल कागजों के आधार पर राशि जारी कर दी गई।

क्या बोल रहे हैं जिम्मेदार

इस पूरे मामले में लोकायुक्त की ओर से कहा गया है कि जांच प्रतिवेदन भोपाल मुख्यालय भेजा जा चुका है। वहां से मिलने वाले निदेर्शों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। टीआई लोकायुक्त राजेंद्र वर्मा ने बताया कि निगम का प्रतिवेदन बाद में प्राप्त हुआ है। जांच को और मजबूत करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया है।

भ्रष्टाचार रुकने तक हम करेंगे प्रयास 


शहर में बढ़ रहे डॉग बाईट और कुत्तों की संख्या के कारण हम लगातार अनियमितता और भ्रष्टाचार की शिकायत कर रहे हैं। हमने सारे तथ्यों के साथ यह बात निगम परिषद में भी रखी थी। लेकिन कोई सुनवाई नहीं होने पर लोकायुक्त के समक्ष प्रकरण रखा। वहां 27 दिसंबर 25 को हमारे बयान लिए गए थे। निगम द्वारा जानबू­ाकर जवाब नहीं दिया गया है। हमारा उद्देश्य है कि भ्रष्टाचार रुके और आम लोगों को समस्या से निजात मिल सके, इसके लिए हम प्रयास करते रहेंगे। 
-भावना हितेश पैमाल, पार्षद, गांधीनगर