बांछड़ा डेरों में पहुंची पुलिस, बच्चियों और महिलाओं ने खोली बंद दरवाज़ों के पीछे की हकीकत
रतलाम के ढोढर स्थित बांछड़ा डेरों में पुलिस पहुंची। बच्चियों और महिलाओं ने बताई हकीकत, SP अमित कुमार की पहल पर जनसंवाद।
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एसपी की पहल पर पंहुची टीम ने सवा सौ घरों में किया जन संवाद
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बच्चियों को पढ़ाई, पुलिस मदद के लिए हेल्पलाइन और रोजगार के अवसरों की भी जानकारी दी
Crime Desk @newsmpg । जिले के ढोढर की बांछड़ा बस्ती में एक बार फिर से पुलिस ने बच्चियों और महिलाओं को कुरीतियों से निकालकर समाज की मुख्य धारा तक लाने की कोशिश शुरु की है। एसपी अमित कुमार की पहल पर महिला अधिकारी वहां पंहुचीं और लोगों से संवाद करके उनकी परेशानियां जानी।
एसपी अमित कुमार की पहली पर न केवल कार्रवाई बल्कि समाज के युवाओं, खासकर बच्चियों की समस्या जानने की पहल की गई। महिला थाना प्रभारी रेखा चौधरी के नेतृत्व में पुलिस टीम ढोढर-बांछड़ा बस्ती पहुंची। पुलिस ने खुद पहल करते हुए बस्ती में बैठकर शिक्षा, सुरक्षा, घरेलू परिस्थितियों और भविष्य से जुड़े सवाल किए।
रतलाम पुलिस से जुड़े :- https://ratlam.mppolice.gov.in/
बांछड़ा डेरों के भ्रमण के दौरान करीब 100- 125 घरों और लगभग 750 की आबादी से संपर्क किया गया। यहां 146 नाबालिग बालिकाओं की शिक्षा की स्थिति सामने आई, जो विद्यालय जा रही हैं, लेकिन 5वीं या 6ठी कक्षा के बाद लगभग 70 प्रतिशत बालिकाओं की पढ़ाई छुड़वा दी जाती है। पुलिस टीम ने बच्चियों से सीधे बात कर पढ़ाई जारी रखने के महत्व को समझाया। कुछ युवाओं ने बताया कि कुछ परिवारों में कुरीतियां थी, लेकिन पूरे समुदाय को इससे जोड़ना सही नहीं है।
शोषण, पढ़ाई छुड़वाने पर होगी कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों ने बच्चियों को भी समााया कि शोषण, चाहे उसे सामाजिक परंपरा का नाम दिया जाए, परिवार करे या बाहर का व्यक्ति, कानून में अपराध है। यह सामाजिक समस्या है, परंपरा नहीं। पढ़ाई छुड़ाना, कम उम्र में जिम्मेदारियां थोपना ये मानवाधिकार उल्लंघन है। पुलिस ने यह भी बताया कि किस स्थिति में तुरंत मदद ली जा सकती है और कैसे। इसके लिए जरूरी हेल्पलाइन नंबर, बांछड़ा समाज और महिलाओं, बच्चियों, युवाओं के लिए चलने वाली योजनाओं और उनसे दी जाने वाली मदद आदि की जानकारी भी दी गई
“महिला हेल्पलाइन 181”???? https://womenhelpline.mp.gov.in
क्यों संवेदनशील है ये इलाका
मध्यप्रदेश-राजस्थान सीमा से सटे कुछ क्षेत्रों को लेकर समय-समय पर यह बात सामने आती रही है कि महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, शिक्षा और सामाजिक स्वतंत्रता यहां एक गंभीर चुनौती रही है। कोई आधिकारिक पहचान या पूरे समुदाय पर लागू सच नहीं है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट और न्यायिक हस्तक्षेपों के जरिये यह स्पष्ट हुआ है कि कुछ इलाकों में शारीरिक शोषण लंबे समय से होता रहा है। अन्य अपराध और अपराधियों का आना जाना भी रहता है। इसी कारण एसपी की पहल पर पुलिस ने केवल अपराध पर नियंत्रण नहीं बल्कि रोकथाम और बच्चियों को मदद देने की भूमिका निभा रही है।
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