रतलाम में चिकित्सा इतिहास रचा - पहली बार दूरबीन से ब्रेन सर्जरी, मरीज का है ये हाल !

रतलाम में पहली बार दूरबीन तकनीक से ब्रेन सर्जरी कर न्यूरोसर्जन डॉ. मिलेश नागर ने गंभीर मरीज को नया जीवन दिया। बिना खोपड़ी खोले की गई इस सर्जरी से मरीज मात्र चार दिन में स्वस्थ होकर घर लौटा।रतलाम में चिकित्सा क्षेत्र ने इतिहास रचते हुए पहली बार दूरबीन तकनीक से ब्रेन सर्जरी की गई। गंभीर अवस्था में लाए गए मरीज की न्यूरोसर्जन डॉ. मिलेश नागर ने बिना खोपड़ी खोले सफल सर्जरी की, जिससे मरीज चार दिन में स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हुआ।

रतलाम में चिकित्सा इतिहास रचा - पहली बार दूरबीन से ब्रेन सर्जरी, मरीज का है ये हाल !
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Health Desk@newsmpg।  चिकित्सा इतिहास में रतलाम ने एक और मील का पत्थर स्थापित किया है। शहर में पहली बार अत्याधुनिक दूरबीन तकनीक से न्यूरो सर्जन डॉ. मिलेश नागर ने एक मरीज के मस्तिष्क की जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की। गंभीर हालत में आए मरीज की चार ही दिनों में छुट्टी भी कर दी गई और अब वे पूरी तरह स्वस्थ है। 
69 वर्षीय रामलाल मेंहरू को जब अस्पताल लाया गया, तब उनकी हालत अत्यंत नाजुक थी। वे बेहोशी की अवस्था में थे और आॅक्सीजन सहारे पर रखे गए थे। मस्तिष्क में बढ़ता दबाव उनकी जान के लिए गंभीर खतरा बन चुका था। ऐसे हालात में सटीक निर्णय और समय पर हस्तक्षेप ही जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय करता है। हालत ऐसी थी कि चंद मिनटों की देरी सब कुछ खत्म कर सकती थी। ऐसे में परिजनों ने बाहर भागकर समय बर्बाद करने के बजाय राघव न्यूरो ट्रामा सेंटर पंहुचे। अनुभवी न्यूरोसर्जन डॉ नागर ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तुरंत सीटी स्कैन कराया। जांच में सामने आया कि मरीज के मस्तिष्क में सबड्यूरल हेमरेज, यानी खून का थक्का जम चुका है। यह ऐसी स्थिति होती है, जिसमें थोड़ी-सी देरी भी स्थायी क्षति या मृत्यु का कारण बन सकती है।

खोपड़ी खोलने के बजाय लिया ये निर्णय

आमतौर पर मस्तिष्क शल्यक्रिया में सिर की खोपड़ी खोलनी पड़ती है, जिससे दर्द, जोखिम और उपचार अवधि बढ़ जाती है। लेकिन डॉ. नागर ने हालात को देखते हुए पारंपरिक शल्यक्रिया के बजाय दूरबीन विधि से आॅपरेशन का निर्णय लिया। परिजनों को बताया कि इस शल्यक्रिया में सिर में केवल अत्यंत छोटा छिद्र किया गया। दूरबीन कैमरे से मस्तिष्क के भीतर का क्षेत्र स्पष्ट रूप से देखा गया। खून के थक्के को पूरी सटीकता के साथ हटाया गया। आसपास के स्वस्थ ऊतकों को नुकसान से बचाया गया। यही कारण है कि इस तकनीक को न्यूरो सर्जरी की दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव माना जाता है। हालांकि इसके लिए बेहद उच्च तकनीकी दक्षता और गहरे अनुभव की आवश्यक्ता होती है। 

रिकवरी ने चौंकाया, चौथे दिन अस्पताल से छुट्टी

शल्यक्रिया के बाद मरीज की हालत में तेजी से सुधार हुआ। अगले ही दिन वे पूरी तरह होश में आ गए। दूसरे दिन चलने-फिरने लगे और चौथे दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। जिस स्थिति में मरीज को अस्पताल लाया गया था, वहां से इतनी शीघ्र सुधार देख परिजन भी दंग रह गए। परिजनों ने कहा कि यह सफलता रतलाम और आसपास के जिलों के मरीजों के लिए बड़ी राहत है। मस्तिष्क रक्तस्राव, सिर की गंभीर चोट और पक्षाघात जैसे मामलों में इंदौर या अहमदाबाद जैसे महानगरों तक तत्काल भागने और रास्ते में ही बुरा होने के डर से भी मुक्ति मिली है।

क्यो बड़ी है ये उपलब्धि? 

शहर के चिकित्सा जगत से जुड़े कई लोगों का मानना है कि यह उपलब्धि सिद्ध करती है कि सही दृष्टि और आधुनिक संसाधनों के साथ छोटे शहरों में भी उच्चस्तरीय न्यूरो उपचार संभव है। न्यूरो सर्जरी केवल बड़ी इमारतों या महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि कुशल अनुभव और कौशल महत्वपूर्ण है। डॉ. मिलेश नागर का मानना है कि दूरबीन विधि से की गई शल्यक्रिया न केवल अधिक सुरक्षित होती है, बल्कि इससे मरीज का दर्द, जोखिम और अस्पताल में रहने की अवधि भी काफी कम हो जाती है। राघव न्यूरो ट्रॉमा केयर सेंटर में अत्याधुनिक न्यूरो गहन चिकित्सा इकाई की सुविधा भी उपलब्ध है। मस्तिष्क रक्तस्राव, सिर की गंभीर चोट, लकवा, अन्य जटिल न्यूरोलॉजिकल रोगों के लिए 24 घंटे सुविधा उपलब्ध है।