ज्ञापन देने जा रहे करणी सैनिकों को फोरलेन पर रोका, धूप में डटे आंदोलनकारी! जीवन सिंह शेरपुर बोले – “हम आतंकवादी है या गुलाम !
रतलाम में कलेक्ट्रेट घेराव के लिए आ रहे करणी सेना के कार्यकर्ताओं को प्रशासन ने महू-नीमच फोरलेन पर डोसीगांव के पास रोक दिया। चिलचिलाती धूप में महिलाएं और बच्चे सहित आंदोलनकारी घंटों सड़क पर डटे रहे। प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर ने इसे नागरिक अधिकारों का हनन बताते हुए कलेक्टर से मिलने की मांग पर अड़े रहे। पुलिस और प्रशासन ने मौके पर भारी बल तैनात कर ज्ञापन लेने की कोशिश की, लेकिन आंदोलनकारी शहर में प्रवेश की मांग करते रहे।
-
चिलचिलाती धूप में डटे रहे आंदोलनकारी, बच्चों को गोद में लेकर बैठी महिलाएं
-
सेना प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर ने कहा- हम भारत के नागरिक तो हमें ज्ञापन देने आने का हक क्यों नहीं?
रतलाम। एक बार फिर से करणी सेना के आंदोलन के चलते प्रशासन और पुलिस ने आंदोलनकारियों को शहर में आने से ही रोक दिया। मंगलवार दोपहर कलेक्ट्रेट का घेराव करने के लिए करणी सेना के सदस्य प्रमुख जीवन सिंह के नेतृत्व में आ रहे थे, जिन्हें महू-नीमच रोड पर डोसीगांव के पहले ही रोक दिया गया। इसके लिए प्रशासन ने पूरे फोरलेन पर ही बेरिकेंटिंग करवा दी। इसके आगे शहर की ओर रास्तों पर भी ट्रक और ट्रैक्टर खड़े करवा दिए। इसके चलते वहीं कड़ी धूप में सड़क पर घंटों आंदोलन चलता रहा, जिसमें करणी सैनिकों ने बाहर ही रोकने पर भी कड़ी आपत्ति जताई।
यह पूरा माजरा मंगलवार सुबह शुरु हुआ। करणी सेना के प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर ने मंगलवार को अपने कार्यकर्ताओं के साथ 11 सूत्रीय मांग को लेकर रतलाम आने की घोषणा की थी। इसके बाद करणी सैनिक जिनमें महिलाएं, पुरुष शामिल रहे वे रतलाम पंहुचे। इसके पहले ही प्रशासन और पुलिस ने शहर के सभी एंट्री पॉइंट और महू-नीमच फोरलेन पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया।
विशेष रूप से जावरा रोड स्थित डोसीगांव के पहले ही बेरीकेट लगाकर आंदोलनकारियों को रोक दिया गया। इसके विरोध में करणी सैनिक महिलाओं ने बैरिकेड्स हटा कर आगे जाने की कोशिश की, लेकिन महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक दिया।
एक महिला हुई बेहोश, रोते रहे बच्चे, बुलवाया गया पानी
आंदोलन में कई महिलाएं भी शामिल हुई जिनमें कई मुस्लिम महिलाओं ने बताया कि उनका रोज है। कई महिलाओं की गोद में छोटे बच्चे भी थे। सभी धूप में रोकने से परेशान होते रहे। इस बीच एक महिला बेहोश भी हो गई जिसे बाद में वाहन से अस्पताल भेजा गया। लोगों को धूप में परेशान होते देख जीवन सिंह शेरपुर ने पीने के पानी वाहन से बुलवाया और न केवल आंदोलनकारियों बल्कि पुलिस के लिए भी व्यवस्था की।
क्या है हम भारत के नागरिक नहीं...
इस दौरान प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर ने कहा कि कलेक्टर व प्रशासन हमें रोक कर गलत कर रहा है। हम जनता की ही मांग जनसुनवाई में कलेक्टर से मिलकर रखना चाहते थे। कलेक्टर हमारे जिले की प्रमुख है और उनसे मिल सकना, यह हम आम व्यक्ति का अधिकार है। हम केवल जनता की समस्या बताना चाहते है, लेकिन हमें दबाने की कोशिश की जा रही है। इस दौरान अन्य कई करणी सैनिकों ने भी विरोध जताते हुए कहा कि शांतिपूर्वक किए जा रहे आंदोलनों को दबाने की कोशिश करके सरकार तानाशाही कर रही है।
आंदोलनकारी नारेबाजी करते रहे। मौके पर तहसीलदार ऋषभ ठाकुर, एसडीएम आर्ची हरित, एसडीओपी किशोर पाटनवाला, सीएसपी सत्येंद्र घनघोरिया, टीआई गायत्री सोनी, सत्येंद्र रघुवंशी सहित भारी मात्रा में पुलिस बल, कर्मचारी आदि मौजूद थे। अधिकारियों ने आंदोलनकारियों से चर्चा कर ज्ञापन लेने की कोशिश की, लेकिन श्री शेरपुर कलेक्टर से मिलने की मांग पर अड़े रहे।
डंपर जब्ती से में शुरू हुआ था विवाद
उल्लेखनीय है कि सात दिन पहले जावरा ब्लॉक में झालवा-कलालिया रोड निर्माण में लगे दो डंपरों को खनिज विभाग ने अवैध परिवहन के आरोप में जब्त किया था। ये दोनों डंपर ठेकेदार आयुष शर्मा के हैं, जिन्हें जीवनसिंह शेरपुर का समर्थक बताया जाता है। जब्ती के विरोध में शेरपुर ने समर्थकों के साथ रिंगनोद थाने में गादी-बिस्तर लगाकर रात भर धरना दिया था। शेरपुर का आरोप था कि खनिज विभाग ने अवैध उत्खनन के नाम पर खाली डंपरों को पकड़कर कार्रवाई की है, जिसके बाद उन्होंने कलेक्ट्रेट घेराव की घोषणा की थी। प्रदर्शन के माध्यम से प्रशासन के समक्ष जिले के जनहित से जुड़े 11 मुद्दे रखे हैं।