ऑटिज्म क्या है? रतलाम में खास पहल: विशेषज्ञों ने दी सलाह, बच्चों ने दिखाई प्रतिभा!
रतलाम में ऑटिज्म जागरूकता माह के तहत रिहैब बेटर थेरेपी सेंटर ने ड्रॉइंग प्रतियोगिता आयोजित की। विशेषज्ञों ने बताया कि समय पर पहचान और थेरेपी से ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों का जीवन बेहतर बनाया जा सकता है।
Health Desk@newsmpg। बच्चों में तेजी से बढ़ते ऑटिज्म के मामलों को देखते हुए रतलाम में जागरूकता की एक खास पहल सामने आई है। विश्व ऑटिज्म जागरूकता माह के तहत रिहैब बेटर मल्टीडिसिप्लिनरी थेरेपी सेंटर द्वारा ड्रॉइंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ एवं रिधान हॉस्पिटल के संस्थापक डॉ. देवेंद्र शाह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे और प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया।
प्रतियोगिता में मिशिता डोडियार ने प्रथम, ऋषभ राणा ने द्वितीय और वियान पाटीदार ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इस मौके पर सेंटर के संस्थापक एवं ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट डॉ. ईश्वर पाटीदार ने ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) को लेकर अहम जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि ऑटिज्म एक जन्मजात न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर है, जिसमें बच्चों के व्यवहार, संवाद क्षमता और सामाजिक समझ पर असर पड़ता है। हर बच्चा अलग तरह से प्रभावित होता है, इसलिए इसे “स्पेक्ट्रम” कहा जाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि टीकाकरण और ऑटिज्म के बीच किसी प्रकार का संबंध साबित नहीं हुआ है।
शुरुआती पहचान है सबसे जरूरी
डॉ. पाटीदार ने बताया कि ऑटिज्म का पूर्ण इलाज संभव नहीं है, लेकिन यदि समय पर पहचान और सही थेरेपी मिल जाए तो बच्चे सामान्य जीवन की ओर बढ़ सकते हैं। इसके लिए बिहेवियरल थेरेपी, स्पीच थेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी और सेंसरी इंटीग्रेशन थेरेपी बेहद कारगर हैं। खासतौर पर ऑक्यूपेशनल थेरेपी बच्चों को दैनिक जीवन के जरूरी कौशल सिखाने में मदद करती है, जबकि सेंसरी इंटीग्रेशन थेरेपी उनके मस्तिष्क को संवेदनाओं को संतुलित करने में सक्षम बनाती है।
भारत में 80% बच्चों का समय पर नहीं होता निदान
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि देश में जागरूकता की कमी के कारण करीब 80 प्रतिशत बच्चों का समय पर डायग्नोसिस नहीं हो पाता। अभिभावकों को सलाह दी गई कि यदि 18 से 24 महीने की उम्र में बच्चा आंख से संपर्क नहीं करता, नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया नहीं देता या अकेले खेलता है, तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें।
डॉ. पाटीदार ने बताया कि वे पिछले 10 वर्षों से इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं और रतलाम में उनका सेंटर एक ऐसा स्थान है, जहां ऑक्यूपेशनल थेरेपी, स्पीच थेरेपी, फिजियोथेरेपी, ऑडियोलॉजी, एबीए थेरेपी, ब्रेन जिम सहित कई आधुनिक सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध हैं। कार्यक्रम में सरिता पाटीदार, डॉ. बलराम धाकड़, डॉ. रीना गहलोत, बलराम पाटीदार, नाजिया खान और पारुल सिद्धोट सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
जागरूकता ही सबसे बड़ा इलाज
इस आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि ऑटिज्म से डरने की नहीं, समझने की जरूरत है। समय पर पहचान और सही थेरेपी से ये बच्चे भी आत्मनिर्भर बन सकते हैं और समाज में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।