खेड़ापति हनुमान मंदिर विवाद: राजनीति में अखंड रामायण किया खंडित--संतों ने एसडीएम और एसपी को सौंपा ज्ञापन, पुलिस व ट्रस्ट पदाधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप
रतलाम के सगोद रोड स्थित खेड़ापति हनुमान मंदिर विवाद को लेकर महंत श्री कृष्ण दास जी मोनी महाराज एवं उनके शिष्य सेवानाथ जी ने एसडीएम और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा। संतों ने पुलिस अधिकारियों और ट्रस्ट पदाधिकारियों पर धार्मिक गतिविधियों में हस्तक्षेप, अभद्र व्यवहार और दबाव में कार्रवाई करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
रतलाम @newsmpg। सगोद रोड स्थित खेड़ापति हनुमान मंदिर को लेकर चल रहे विवाद के मामले में सोमवार को महंत श्री कृष्ण दास जी मोनी महाराज एवं उनके शिष्य सेवानाथ जी ने एसडीएम और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन में मंदिर परिसर में हुई हालिया घटनाओं को लेकर पुलिस अधिकारियों तथा ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
संतों ने ज्ञापन में कहा कि वे लंबे समय से मंदिर में पूजा-अर्चना और धार्मिक गतिविधियों का संचालन करते आ रहे हैं। उनके अनुसार पुरुषोत्तम मास के अवसर पर मंदिर में अखंड रामायण पाठ चल रहा था, जिसे पुलिस हस्तक्षेप के कारण बाधित किया गया। संतों का आरोप है कि ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों की शिकायत और कथित मिलीभगत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मंदिर के पुजारी सेवानाथ जी को वहां से हटाया।
न्यायलय में विचाराधीन है मामला
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि मंदिर से संबंधित मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद पुलिस द्वारा हस्तक्षेप किए जाने और संतों के साथ अभद्र व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया गया है। संतों का कहना है कि वर्तमान नगर निगम में एमआईसी सदस्य के कहने पर देर रात पुलिसकर्मियों द्वारा मंदिर परिसर में पहुंचकर सीसीटीवी कैमरे खुलवाए गए, मोबाइल फोन जब्त किए गए तथा साधु-संतों को वहां से हटाया गया।
निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर हो कार्रवाई
महंत श्री कृष्ण दास जी मोनी महाराज ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने तथा संबंधित पुलिस अधिकारियों, ट्रस्ट अध्यक्ष एवं अन्य जिम्मेदार पदाधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। उनका आरोप है कि यह पूरी कार्रवाई कुछ प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तियों के दबाव में की गई। ज्ञापन प्राप्त होने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है। वहीं, इस संबंध में पुलिस एवं ट्रस्ट पदाधिकारियों का पक्ष सामने आना शेष है।