सनातन संस्कृति के संरक्षण को लेकर बड़ा फैसला: आनंद गिरि महाराज बोले—अब गांव-गांव तक पहुंचेंगे
बड़नगर में दशनामी दत्त सेना संगठन की प्रदेश स्तरीय बैठक में महामंडलेश्वर 1008 आनंद गिरि जी महाराज ने रतलाम जिले में संगठन विस्तार, सामाजिक-धार्मिक जागरण और सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए व्यापक अभियान चलाने की घोषणा की। बैठक में युवाओं को संगठन से जोड़ने, मठ-मंदिरों के संरक्षण, गौ सेवा, संत सम्मान और धार्मिक स्थलों को अतिक्रमण मुक्त कराने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। जल्द ही रतलाम में संतों की वृहद बैठक आयोजित करने की भी बात कही गई।
बड़नगर में दशनामी दत्त सेना संगठन की प्रदेश स्तरीय बैठक सम्पन्न
उज्जैन@newsmpg। समाज की वास्तविक शक्ति उसकी एकता, संस्कार और संगठन में निहित है। इसी उद्देश्य को लेकर दशनामी दत्त सेना संगठन के माध्यम से रतलाम जिले में सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक जागरण का व्यापक अभियान प्रारंभ किया जाएगा। यह बात महामंडलेश्वर 1008 आनंद गिरि जी महाराज ने कही। बड़नगर में आयोजित दशनामी दत्त सेना संगठन की प्रदेश स्तरीय बैठक में संगठन के विस्तार, सामाजिक एवं धार्मिक जागरण तथा सनातन संस्कृति के संरक्षण को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
यहां आनंदगिरी जी महाराज ने संगठन के पदाधिकारियों एवं कार्यकतार्ओं को समाजहित में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि संगठन का उद्देश्य समाज को एक सूत्र में जोड़ना, सनातन संस्कृति की रक्षा करना तथा संत समाज के मार्गदर्शन में जन-जागरण के कार्यों को गति देना है। मठ-मंदिरों की सुरक्षा एवं संरक्षण, गौ सेवा को बढ़ावा देना, संत-महात्माओं का सम्मान, प्राचीन मठ, मंदिर एवं समाधि स्थलों को अतिक्रमण मुक्त कराना तथा धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखने जैसे कार्य प्राथमिकता से किए जाएंगे।
रतलाम में युवाओं और सेवाभावियों को लाएं आगे
बैठक में रतलाम जिले के दायित्ववान पदाधिकारियों, कार्यकतार्ओं एवं युवाओं से संगठन को गांव-गांव और नगर-नगर तक सशक्त बनाने, अधिक से अधिक युवाओं को संगठन से जोड़ने तथा सेवा, संस्कार और समाज जागरण के कार्यों में बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाने का आग्रह किया गया। महाराज ने बताया कि रतलाम जिले में शीघ्र ही संत-महात्माओं की एक वृहद बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें विभिन्न अखाड़ों, मठों एवं धार्मिक संस्थाओं के संतों के साथ विचार-विमर्श कर संगठन के उद्देश्यों को व्यवस्थित एवं चरणबद्ध रूप से क्रियान्वित करने की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। कहा, "संगठन ही शक्ति है, एकता ही हमारी सबसे बड़ी सामर्थ्य है। जब समाज संगठित होगा, तभी धर्म, संस्कृति और राष्ट्र सुरक्षित एवं सशक्त बनेंगे।"