विंड पावर कंपनियों पर करोड़ों का भुगतान रोकने और किसानों से वादाखिलाफी के आरोप
देश में स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए तेजी से विस्तार कर रही विंड पावर परियोजनाओं पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। छोटे ठेकेदारों, वेंडरों और किसानों ने आर्थिक शोषण, भुगतान रोकने और वादाखिलाफी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
इंदौर/धार | देश में स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए तेजी से विस्तार कर रही विंड पावर परियोजनाओं पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। पवन ऊर्जा परियोजनाओं से जुड़ी कंपनियों आइनॉक्स जीएफएल (Inox GFL), वाइब्रेंट एनर्जी (Vibrant Energy) और अत्रिवाल इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड पर छोटे ठेकेदारों, वेंडरों और किसानों ने आर्थिक शोषण, भुगतान रोकने और वादाखिलाफी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
पीड़ितों का कहना है कि बड़ी कंपनियां करोड़ों रुपये की परियोजनाएं तो समय पर पूरी करवा लेती हैं, लेकिन काम कराने वाले स्थानीय ठेकेदारों और वेंडरों का भुगतान महीनों और वर्षों तक लंबित रखा जाता है। इससे छोटे व्यवसायी आर्थिक संकट में फंस रहे हैं, जबकि किसानों को भी रोजगार और जमीन से जुड़े वादों के पूरे नहीं होने का आरोप है।
करोड़ों रुपये के भुगतान अटके होने का दावा
मां नागणेचा सिक्योरिटीज एंड डेवलपमेंट के प्रतिनिधियों का आरोप है कि उन्होंने विभिन्न विंड पावर परियोजनाओं में सुरक्षा, विकास और अन्य कार्य किए, लेकिन करोड़ों रुपये का भुगतान आज तक नहीं मिला। उनका कहना है कि भुगतान मांगने पर उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा और दबाव भी बनाया गया।
फर्म के अनुसार, अमझेरा थाने में हुई चर्चा के दौरान पहले अत्रिवाल इन्फ्रास्ट्रक्चर ने किसी भी बकाया राशि से इनकार किया, लेकिन बाद में हिसाब-किताब में करीब 49 लाख रुपये की देनदारी सामने आई। दावा है कि 32 लाख रुपये पर समझौता हुआ, लेकिन एक माह बीतने के बाद भी केवल 5 लाख रुपये ही मिले, जबकि 27 लाख रुपये अब भी बकाया हैं।
इसी तरह वाइब्रेंट एनर्जी पर भी धार जिले की दो परियोजनाओं के लगभग 19 लाख रुपये तीन वर्षों से लंबित रखने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा अन्य कार्यों के करीब 46 लाख रुपये भी बकाया बताए गए हैं। फर्म का दावा है कि उसने आगर मालवा जिले में भी कंपनी के लिए 32 स्थानों पर कार्य किया था।
किसानों ने लगाया वादाखिलाफी और फसल नुकसान का आरोप
धार जिले की सरदारपुर तहसील के ग्राम सगवाल के किसानों ने भी कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि जमीन लीज पर लेने के बाद उनकी सहमति के बिना खेतों में प्रवेश किया गया, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचा। किसानों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिला।
कई किसानों का दावा है कि परियोजना शुरू होने के समय उन्हें 29 वर्ष 11 माह तक गार्ड की नौकरी देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन बाद में यह वादा पूरा नहीं किया गया। किसानों का कहना है कि इससे उनके परिवार आर्थिक संकट और मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं।
हरित ऊर्जा की आड़ में स्थानीय लोगों का शोषण?
पीड़ितों का आरोप है कि विंड पावर परियोजनाओं के नाम पर स्थानीय ठेकेदारों, मजदूरों और किसानों से काम तो लिया जाता है, लेकिन भुगतान और रोजगार के मामलों में उन्हें लगातार संघर्ष करना पड़ता है। उनका कहना है कि बड़ी कंपनियों के सामने छोटे ठेकेदार और ग्रामीण अपनी वैध राशि तथा अधिकारों के लिए भटकने को मजबूर हैं।पीड़ितों ने राज्य सरकार और प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, लंबित भुगतान दिलाने तथा किसानों और स्थानीय ठेकेदारों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कार्रवाई की मांग की है।
(नोट : इस समाचार में उल्लेखित सभी वित्तीय दावे, भुगतान विवाद, रोजगार संबंधी आश्वासन और अन्य आरोप संबंधित ठेकेदारों एवं किसानों द्वारा लगाए गए हैं। संबंधित कंपनियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)