Breast Cancer: महिलाओं के लिए जरूरी जानकारी, ब्रेस्ट कैंसर से बचने और इसके इलाज के दौरान नहीं खानी चाहिए ये चीजें

Breast Cancer Prevention: महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं. आपको बता दें कि ब्रेस्ट कैंसर पुरुषों में भी होता है लेकिन महिलाओं की तुलना में ऐसे केस काफी कम देखने को मिलते हैं. पुरुषों में जैसे प्रोस्टेट कैंसर का खतरा अधिक होता है, इसी तरह महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कैंसर के अन्य प्रकारों की तुलना में अधिक होता है. जिस तेजी से महिलाओं की जीवनशैली यानी लाइफस्टाइल बदली है, उसने इस बीमारी को अधिक फैलाने का काम किया है. आपको जरूर पता होना चाहिए कि किन चीजों को खाने से यह समस्या बढ़ जाती है या ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है. साथ ही यह भी जानना जरूरी है कि एक बार यदि बीमारी कंफर्म हो जाए तो अपनी डायट में तुरंत क्या बदलाव करना है. ब्रेस्ट कैंसर के कारण (Cause of breast Cancer)?कैंसर के ज्यादातर प्रकारों पर जो बात लागू होती है, वह ब्रेस्ट कैंसर पर भी प्रमुखता से लागू होती है. यानी अनुवांशिकता. यदि परिवार या पुरानी पीढ़ी में किसी को यह बीमारी रही है तो नई पीढ़ी की महिलाओं में भी इसके होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. मोटापे के कारण भी ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है. गलत लाइफस्टाइल यानी खान-पान और सोने-जागने संबंधी लापरवाहियों के चलते ब्रेस्ट कैंसर को बढ़ाने वाले कारण ट्रिगर हो रहे हैं. जिन महिलाओं की बचपन में या टीनऐज में रेडिएशन संबंधी कोई इलाज हुआ होता है, उनमें भी इसकी आशंका बढ़ जाती है. जिन बच्चियों के पीरिड्स 12 साल की उम्र से पहले शुरू हो जाते हैं, उनमें ब्रेस्ट कैंसर का खतरा काफी अधिक बढ़ जाता है. जो महिलाएं 30 साल की उम्र के बाद अपने पहले बच्चे को जन्म देती हैं, उनमें भी ब्रेस्ट कैंसर का खतरा अधिक होता है. जो महिलाएं कभी प्रेग्नेंट नहीं होतीं, उनमें ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बहुत अधिक होता है. ब्रेस्ट कैंसर का पता चलने पर क्या ना खाएं? यदि जांच के दौरान ब्रेस्ट कैंसर होने की पुष्टि हो जाए तो रोगी को तुरंत अपनी डायट से कुछ चीजों को पूरी तरह हटा देना चाहिए. ताकि समस्या और अधिक ना बढ़े... चाय और कॉफी की तरह कैफीन युक्त सभी चीजों को अपनी डेली डायट से एकदम हटा दों. पैकेट में आने वाले फूड्स का सेवन ना करें. घर का बना ताजा खाना खाएं. ऑइली फूड, डीप फ्राइड और मसाले युक्त भोजन का सेवन बहुत ही कम कर दें. बेहतर होगा कि यदि आप इसे लेना बंद कर दें. मैदा से बने फूड्स से दूर रहें. ऐसा इसलिए क्योंकि इनके सेवन से डायजेस्टिव सिस्टम स्लो होता है, कॉन्स्टिपेशन बढ़ता है. ऐसा होने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर बुरा असर पड़ता है और बीमारी शरीर पर अधिक हावी होती है. उन अंडो का सेवन ना करें जो पूरी तरह ना उबले हों या पुराने हों. यहां क्लिक करके जानें के पुराने और नए अंडे की पहचान कैसे की जाती है. शराब का सेवन पूरी तरह बंद कर दें. सॉफ्ट ड्रिंक्स के नाम पर बाजार में मिलने वाली अन्य ड्रिंक्स का सेवन भी फिलहाल आपके लिए अच्छा नहीं है. पुराने या अधपके मीट का सेवन बिल्कुल ना करें. ये आपकी समस्या को गंभीर बनाने का काम कर सकता है. हाइजीन का अधिक ध्यान रखें. खासतौर पर खान-पान के दौरान ऐसी चीजों का सेवन करने से बचें, जिनके पुराने या बासी होने का डाउट हो. फल-सब्जियां अच्छी तरह धोकर ही उपयोग में लें.  ऐसा कोई काम ना करें, जिससे आपकी तबीयत खराब हो जाए या फीवर जैसी समस्या हो. क्योंकि आपका शरीर पहले से कमजोर है, ऐसी कोई भी स्थिति आपके शरीर के लिए मुसीबतें बढ़ाने का काम करेगी. इसलिए बहुत ठंडी चीजों का सेवन करने से भी बचें. ब्रेस्ट कैंसर की सर्जरी के बाद क्या खाएं? प्रोटीन है बेहद जरूरी: ब्रेस्ट कैंसर के लिए जब सर्जरी की जाती है तो इसके बाद रिकवरी के लिए शरीर को अच्छी मात्रा में प्रोटीन की जरूरत होती है. क्योंकि कीमो थेरपी और रेडिएशन थेरपी के दौरान भी शरीर काफी कमजोरी महसूस करता है. ऐसे में शरीर को एनर्जी के लिए और नई कोशिकाओं के निर्माण के लिए भी अच्छी मात्रा में प्रोटीन चाहिए होता है. इसलिए आप अपनी डायट में अंडा, पनीर, दही, लो फैट मिल्क, ड्राई फ्रूट्स, दालें और सोया शामिल करें. फाइबर और ऐंटिऑक्सीडेंड्स: अंगूर, किशमिश और मुनक्का में बहुत अच्छी मात्रा में ऐंटिऑक्सिडेंट्स पाए जाते हैं. साथ ही ये फाइबर से भी भरपूर होते हैं और नैचरल शुगर से भी. इस कारण इनका सेवन आपके शरीर को पोषण देने के साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी बढ़ोतरी करता है.  अंजीर और केसर जरूर खाएं: कैंसर के इलाज के दौरान और इसके बाद दोनों ही समय पर आप को जिन चीजों का सेवन करना है, इनमें केसर और अंजीर प्रमुखता से शामिल हैं. अंजीर फ्लेवोनॉइड से भरपूर होने के कारण शरीर की अंदरूनी सूजन को दूर करने और कोशिकाओं में रक्त का प्रवाह बढ़ाने में बहुत मदद करता है. केसर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है और कई फायदे देती है. खास बात यह है कि केसर और अंजीर दोनों में ही कैंसर विरोधी गुण पाए जाते हैं. यानी ये कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकते हैं. हल्दी और दालचीनी का सेवन: कैंसर के इलाज के दौरान और इलाज के बाद आपको हल्दी और दालचीनी इन दोनों मसालों का सेवन जरूर करना चाहिए. ये दोनों ही ऐंटिइंफ्लामेट्री, ऐंटिबैक्टीरियल, ऐंटी-कैंसर गुणों से भरपूर होती हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का काम करती हैं. मेथीदाना और जीरा: अपनी डेली डायट में आप मेथीदाना और जीरे का सेवन जरूर करें. हालांकि भारतीय घरों में इन दोनों ही मसालों का उपयोग होता है. लेकिन कैंसर के इलाज के दौरान और बाद में आपको हर दिन सीमित मात्रा में इनका सेवन करना चाहिए.   Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों व दावों को केवल सुझाव के रूप में लें, एबीपी न्यूज़ इनकी पुष्टि नहीं करता है. इस तरह के किसी भी उपचार/दवा/डाइट और सुझाव पर अमल करने से पहले डॉक्टर या संबंधित एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें.  यह भी पढ़ें: कुछ लोगों की डाय

Breast Cancer: महिलाओं के लिए जरूरी जानकारी, ब्रेस्ट कैंसर से बचने और इसके इलाज के दौरान नहीं खानी चाहिए ये चीजें

Breast Cancer Prevention: महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं. आपको बता दें कि ब्रेस्ट कैंसर पुरुषों में भी होता है लेकिन महिलाओं की तुलना में ऐसे केस काफी कम देखने को मिलते हैं. पुरुषों में जैसे प्रोस्टेट कैंसर का खतरा अधिक होता है, इसी तरह महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कैंसर के अन्य प्रकारों की तुलना में अधिक होता है.

जिस तेजी से महिलाओं की जीवनशैली यानी लाइफस्टाइल बदली है, उसने इस बीमारी को अधिक फैलाने का काम किया है. आपको जरूर पता होना चाहिए कि किन चीजों को खाने से यह समस्या बढ़ जाती है या ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है. साथ ही यह भी जानना जरूरी है कि एक बार यदि बीमारी कंफर्म हो जाए तो अपनी डायट में तुरंत क्या बदलाव करना है.

ब्रेस्ट कैंसर के कारण (Cause of breast Cancer)?
कैंसर के ज्यादातर प्रकारों पर जो बात लागू होती है, वह ब्रेस्ट कैंसर पर भी प्रमुखता से लागू होती है. यानी अनुवांशिकता. यदि परिवार या पुरानी पीढ़ी में किसी को यह बीमारी रही है तो नई पीढ़ी की महिलाओं में भी इसके होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.

  • मोटापे के कारण भी ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है.
  • गलत लाइफस्टाइल यानी खान-पान और सोने-जागने संबंधी लापरवाहियों के चलते ब्रेस्ट कैंसर को बढ़ाने वाले कारण ट्रिगर हो रहे हैं.
  • जिन महिलाओं की बचपन में या टीनऐज में रेडिएशन संबंधी कोई इलाज हुआ होता है, उनमें भी इसकी आशंका बढ़ जाती है.
  • जिन बच्चियों के पीरिड्स 12 साल की उम्र से पहले शुरू हो जाते हैं, उनमें ब्रेस्ट कैंसर का खतरा काफी अधिक बढ़ जाता है.
  • जो महिलाएं 30 साल की उम्र के बाद अपने पहले बच्चे को जन्म देती हैं, उनमें भी ब्रेस्ट कैंसर का खतरा अधिक होता है.
  • जो महिलाएं कभी प्रेग्नेंट नहीं होतीं, उनमें ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बहुत अधिक होता है.

ब्रेस्ट कैंसर का पता चलने पर क्या ना खाएं?

यदि जांच के दौरान ब्रेस्ट कैंसर होने की पुष्टि हो जाए तो रोगी को तुरंत अपनी डायट से कुछ चीजों को पूरी तरह हटा देना चाहिए. ताकि समस्या और अधिक ना बढ़े...

  • चाय और कॉफी की तरह कैफीन युक्त सभी चीजों को अपनी डेली डायट से एकदम हटा दों.
  • पैकेट में आने वाले फूड्स का सेवन ना करें. घर का बना ताजा खाना खाएं.
  • ऑइली फूड, डीप फ्राइड और मसाले युक्त भोजन का सेवन बहुत ही कम कर दें. बेहतर होगा कि यदि आप इसे लेना बंद कर दें.
  • मैदा से बने फूड्स से दूर रहें. ऐसा इसलिए क्योंकि इनके सेवन से डायजेस्टिव सिस्टम स्लो होता है, कॉन्स्टिपेशन बढ़ता है. ऐसा होने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर बुरा असर पड़ता है और बीमारी शरीर पर अधिक हावी होती है.
  • उन अंडो का सेवन ना करें जो पूरी तरह ना उबले हों या पुराने हों. यहां क्लिक करके जानें के पुराने और नए अंडे की पहचान कैसे की जाती है.
  • शराब का सेवन पूरी तरह बंद कर दें. सॉफ्ट ड्रिंक्स के नाम पर बाजार में मिलने वाली अन्य ड्रिंक्स का सेवन भी फिलहाल आपके लिए अच्छा नहीं है.
  • पुराने या अधपके मीट का सेवन बिल्कुल ना करें. ये आपकी समस्या को गंभीर बनाने का काम कर सकता है.
  • हाइजीन का अधिक ध्यान रखें. खासतौर पर खान-पान के दौरान ऐसी चीजों का सेवन करने से बचें, जिनके पुराने या बासी होने का डाउट हो. फल-सब्जियां अच्छी तरह धोकर ही उपयोग में लें. 
  • ऐसा कोई काम ना करें, जिससे आपकी तबीयत खराब हो जाए या फीवर जैसी समस्या हो. क्योंकि आपका शरीर पहले से कमजोर है, ऐसी कोई भी स्थिति आपके शरीर के लिए मुसीबतें बढ़ाने का काम करेगी. इसलिए बहुत ठंडी चीजों का सेवन करने से भी बचें.


ब्रेस्ट कैंसर की सर्जरी के बाद क्या खाएं?

  • प्रोटीन है बेहद जरूरी: ब्रेस्ट कैंसर के लिए जब सर्जरी की जाती है तो इसके बाद रिकवरी के लिए शरीर को अच्छी मात्रा में प्रोटीन की जरूरत होती है. क्योंकि कीमो थेरपी और रेडिएशन थेरपी के दौरान भी शरीर काफी कमजोरी महसूस करता है. ऐसे में शरीर को एनर्जी के लिए और नई कोशिकाओं के निर्माण के लिए भी अच्छी मात्रा में प्रोटीन चाहिए होता है. इसलिए आप अपनी डायट में अंडा, पनीर, दही, लो फैट मिल्क, ड्राई फ्रूट्स, दालें और सोया शामिल करें.
  • फाइबर और ऐंटिऑक्सीडेंड्स: अंगूर, किशमिश और मुनक्का में बहुत अच्छी मात्रा में ऐंटिऑक्सिडेंट्स पाए जाते हैं. साथ ही ये फाइबर से भी भरपूर होते हैं और नैचरल शुगर से भी. इस कारण इनका सेवन आपके शरीर को पोषण देने के साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी बढ़ोतरी करता है. 
  • अंजीर और केसर जरूर खाएं: कैंसर के इलाज के दौरान और इसके बाद दोनों ही समय पर आप को जिन चीजों का सेवन करना है, इनमें केसर और अंजीर प्रमुखता से शामिल हैं. अंजीर फ्लेवोनॉइड से भरपूर होने के कारण शरीर की अंदरूनी सूजन को दूर करने और कोशिकाओं में रक्त का प्रवाह बढ़ाने में बहुत मदद करता है. केसर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है और कई फायदे देती है. खास बात यह है कि केसर और अंजीर दोनों में ही कैंसर विरोधी गुण पाए जाते हैं. यानी ये कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकते हैं.
  • हल्दी और दालचीनी का सेवन: कैंसर के इलाज के दौरान और इलाज के बाद आपको हल्दी और दालचीनी इन दोनों मसालों का सेवन जरूर करना चाहिए. ये दोनों ही ऐंटिइंफ्लामेट्री, ऐंटिबैक्टीरियल, ऐंटी-कैंसर गुणों से भरपूर होती हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का काम करती हैं.
  • मेथीदाना और जीरा: अपनी डेली डायट में आप मेथीदाना और जीरे का सेवन जरूर करें. हालांकि भारतीय घरों में इन दोनों ही मसालों का उपयोग होता है. लेकिन कैंसर के इलाज के दौरान और बाद में आपको हर दिन सीमित मात्रा में इनका सेवन करना चाहिए.

 

Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों व दावों को केवल सुझाव के रूप में लें, एबीपी न्यूज़ इनकी पुष्टि नहीं करता है. इस तरह के किसी भी उपचार/दवा/डाइट और सुझाव पर अमल करने से पहले डॉक्टर या संबंधित एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें. 

यह भी पढ़ें: कुछ लोगों की डायबिटीज हो जाती है पूरी तरह ठीक जबकि दूसरों की नहीं, जानिए क्यों है ऐसा