महज 15 साल की उम्र में शरीर में ऐसा क्या हुआ कि अचानक कोमा जैसी हालत में पहुंच गई बच्ची? पढ़कर उड़ जाएंगे होश!
रतलाम में एक 15 साल की बच्ची की अचानक बिगड़ी तबीयत। डायबिटिक कीटोएसिडोसिस के कारण कोमा जैसी हालत में पहुंची मासूम की डॉक्टरों ने ऐसे बचाई जान। पढ़ें पूरी खबर।
रतलाम (Health Desk)....क्या महज 15 साल की उम्र में भी किसी का शुगर लेवल इतना बढ़ सकता है कि जान पर बन आए? जी हां, रतलाम में एक ऐसा ही हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक 15 वर्षीय किशोरी अचानक शुगर लेवल अत्यधिक बढ़ने के कारण अचेत होकर गिर पड़ी। गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंची बच्ची की डॉक्टरों ने कड़ी मशक्कत और टाइम-टू-टाइम ऑब्जर्वेशन के बाद जान बचा ली।
डायबिटिक कीटोएसिडोसिस का शिकार हुई बच्ची
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मानवी (15 वर्ष) पिता महेंद्र सिंह चौहान को गंभीर और बेहोशी की हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुरुआती जांच में ही डॉक्टरों के होश उड़ गए जब मरीज का शुगर लेवल खतरे के निशान से बहुत ऊपर पाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, शुगर की यह अत्यधिक मात्रा शरीर के लिए जानलेवा साबित हो सकती है और मरीज 'डायबिटिक कीटोएसिडोसिस' (Diabetic Ketoacidosis) जैसी गंभीर स्थिति का शिकार हो चुकी थी।
16 घंटे बाद आया होश
बच्ची को बचाने के लिए मेडिकल स्पेशलिस्ट डॉ. कैलाश चारेल ने तुरंत मोर्चा संभाला और इलाज शुरू किया। मरीज को ओल्ड आईसीयू (Old ICU) में रखकर पल-पल की निगरानी (Close Observation) की गई। 'इंसुलिन स्लाइडिंग स्केल' के तहत सटीक मात्रा में इंसुलिन दिया गया। करीब 16 घंटे तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद आखिरकार बच्ची को होश आ गया।15 साल की मासूम की जान बचने पर परिजनों ने राहत की सांस ली और इलाज करने वाली टीम का दिल से आभार व्यक्त किया।
अत्यंत गंभीर थी हालत
सिविल सर्जन डॉ. ए.पी. सिंह ने बताया कि 27 अक्टूबर को मरीज मानवी को अत्यंत गंभीर हालत में ओल्ड आईसीयू में भर्ती किया गया था। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की तत्परता, समय पर लिए गए निर्णय और सटीक मॉनिटरिंग के कारण ही मरीज को सुरक्षित बचाया जा सका है।