बिना अनुमति रखे प्राइवेट शिक्षक, सरकारी बजट से खरीदी पर उड़ाईं नियमों की धज्जियां!
रतलाम के शासकीय प्राथमिक विद्यालय रूपनगर में बिना अनुमति प्राइवेट शिक्षक रखने और सरकारी फंड से सामग्री खरीदने का मामला सामने आया है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) सिमरन सूर्यवंशी की प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि बच्चों को दी गई शैक्षिक सामग्री स्कूल के लोकल मद से खरीदी गई थी, न कि शिक्षक की निजी जेब से। विभाग ने इसे लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया है और भ्रामक प्रचार पर आपत्ति जताते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।
रतलाम | शासकीय प्राथमिक विद्यालय रूपनगर में बिना शासन की अनुमति के दो प्राइवेट शिक्षक रखने और सरकारी पैसों से सामग्री खरीदकर उसे 'निजी दान' की तरह प्रचारित करने का बड़ा मामला सामने आया है। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चलाए जा रहे दावों के बीच जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) सिमरन सूर्यवंशी का आधिकारिक बयान आया है, जिसमें हुई प्रारंभिक जांच ने तथाकथित 'व्यक्तिगत समाज सेवा' के दावों की हवा निकाल दी है।
क्या है पूरा विवाद?
पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया और कुछ माध्यमों में यह प्रचारित किया जा रहा था कि रूपनगर प्राथमिक स्कूल के शिक्षक श्री बद्रीलाल राठौर अपनी निजी जेब से पैसा खर्च करके स्कूल का संचालन कर रहे हैं, प्राइवेट टीचर रखे हुए हैं और बच्चों को सामग्री बांट रहे हैं।
जब यह मामला प्रशासनिक गलियारों तक पहुंचा, तो जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा विभागीय जांच कराई गई। जांच में जो सच निकलकर सामने आया, वह सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे दावों से बिल्कुल अलग था।
जांच में हुए 4 बड़े खुलासे (Key Findings)
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बिना अनुमति रखे गए 2 प्राइवेट टीचर: स्कूल में शासन की किसी पूर्व स्वीकृति या अनुमति के बिना पिछले 5 वर्षों से 2 गैर-सरकारी शिक्षकों से अध्यापन कार्य कराया जा रहा था।
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निजी जेब से नहीं, सरकारी फंड से खरीदी: बच्चों को जो शैक्षिक सामग्री बांटी गई, वह किसी की अपनी जेब के पैसों से नहीं, बल्कि स्कूल के सरकारी लोकल फंड (लोकल मद) से खरीदी गई थी।
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भंडार क्रय नियमों की उड़ाईं धज्जियां: सामग्री की खरीद-फरोख्त में शासन द्वारा तय 'भंडार क्रय नियमों' (Store Purchase Rules) का पालन बिल्कुल नहीं किया गया।
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जेब से नहीं लगा एक भी रुपया: DEO की जांच से साफ हुआ कि शिक्षक द्वारा अपनी जेब से कोई निजी राशि खर्च नहीं की गई है; परिसर की सुविधाएं और व्यवस्थाएं जनसहयोग व समाजसेवियों से ही जुटाई गई थीं।
नोटिस पर शिक्षक की सफाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा संबंधित शिक्षक श्री बद्रीलाल राठौर को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया गया था।
श्री राठौर ने अपने जवाब में माना कि शाला प्रबंधन समिति सदस्यों और समाजसेवियों के सहयोग से 5 सालों से प्राइवेट शिक्षकों की व्यवस्था की जा रही थी और समाजसेवियों से मिलने वाली राशि से ही उन्हें वेतन दिया जा रहा था।
छवि धूमिल करने की कोशिश, विस्तृत जांच के आदेश
जिला शिक्षा अधिकारी सिमरन सूर्यवंशी ने कहा: "जांच से यह स्पष्ट है कि शिक्षक द्वारा अपनी जेब से कोई राशि खर्च नहीं की गई है। सुविधाएं जनसहयोग से और सामग्री सरकारी मदद से ही आई थी। सोशल व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर भ्रामक प्रचार-प्रसार कर शासन की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया है, जो बेहद अनुचित है।"