थाली में परोसे जा रहे 'धीमे ज़हर' पर प्रहार: फसलों को फटाफट सुखाने वाला केमिकल 'पैराक्वेट' बैन, कंपनियों का स्टॉक होगा नष्ट!
मूंग और फसलों को 24-72 घंटे में जबरन सुखाने के लिए इस्तेमाल होने वाले खतरनाक केमिकल 'पैराक्वेट डाइक्लोराइड' पर पूरी तरह बैन लगा दिया गया है। जानिए कैसे यह केमिकल फेफड़े और किडनी को नुकसान पहुँचा रहा था और सरकार ने कंपनियों के लिए क्या सख्त आदेश दिए हैं।
भोपाल। क्या आप जानते हैं कि हरी-भरी दिखने वाली सब्जियां और मूंग की दाल आपकी थाली तक पहुँचने से पहले किस 'ज़हर' से गुज़र रही थीं? चंद घंटों में फसल सुखाने और मजदूरों का खर्च बचाने के चक्कर में जो केमिकल खेतों में पानी की तरह बहाया जा रहा था, उस पर सरकार ने आखिरकार पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
मानव और पशुओं की सेहत से खिलवाड़ करने वाले बेहद खतरनाक कीटनाशक 'पैराक्वेट डाइक्लोराइड' (Paraquat Dichloride) के उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल पर राज्य शासन ने पूरी तरह रोक लगा दी है। इस दवा को विश्व के ७० से ज्यादा देश पहले ही बैन कर चुके हैं। भारत में लगातार शिकायतों के बस अब इसपर निर्णय हुआ है।
क्या था यह केमिकल और क्यों था इतना खतरनाक?
बाजार में 'ग्रामोक्सोन' (Gramoxone) नाम से बिकने वाला यह रसायन कोई साधारण कीटनाशक नहीं, बल्कि फसलों को रातों-रात सुखाने वाला 'शॉर्टकट' था।
24 से 72 घंटे में फसल खाक: मूंग की कटाई से ठीक पहले किसान पत्तियों को सुखाने के लिए इसका गैर-कानूनी छिड़काव करते थे, जिससे फसल 3 दिन में सूख जाती थी।
कोई इलाज/एंटीडोट नहीं: अगर यह केमिकल शरीर में चला जाए, तो मेडिकल साइंस के पास इसका कोई एंटीडोट नहीं है।
सीधा अंगों पर वार: यह शरीर के अंदर पहुंचते ही फेफड़े और किडनी को छलनी कर देता है। इसके अवशेषों वाले अनाज से कैंसर, लिवर फेलियर और दिमाग की गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है।
सरकार के 3 कड़े निर्देश:
स्टॉक होगा नष्ट: बाजार और गोदामों में जितना भी पैराक्वेट बचा है, कंपनियों को उसे तुरंत वापस बुलाकर नष्ट करना होगा।
लाइसेंस रद्द: कंपनियों को अपने रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट तुरंत केंद्रीय कीटनाशी बोर्ड को सरेंडर करने होंगे।
बिक्री पर बैन: अगर कोई दुकानदार या कंपनी इसे बेचते पाई गई, तो उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
दुनिया के 70 देशों में पहले से बैन!
दुनिया भर के 70 से ज्यादा देश इस कातिल केमिकल को सालों पहले बैन कर चुके हैं। भारत सरकार ने भी कीटनाशक अधिनियम 1968 के तहत इसके सभी रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिए हैं।
'न्यूज़ एमपीजी 24' की अपील:
खेती में थोड़े से समय और पैसों की बचत के लिए अपनी और अपनों की सेहत दांव पर न लगाएं। शुद्ध खाएं, सुरक्षित रहें!
Moderator