खेत में तड़प रही थी आदिवासी महिला, जावरा सिविल अस्पताल की टीम ने दिखाई तत्परता; खुले खेत में ही कराई सफल डिलीवरी
रतलाम के जावरा स्थित लालाखेड़ा में सोयाबीन काटने आई गर्भवती आदिवासी महिला को खेत में प्रसव पीड़ा हुई। सिविल अस्पताल की टीम ने तत्परता दिखाते हुए खेत में ही सफल डिलीवरी कराई।
जावरा । रतलाम जिले के जावरा क्षेत्र स्थित लालाखेड़ा गांव से स्वास्थ्य विभाग की तत्परता और मानवता का एक सराहनीय मामला सामने आया है। खाकरा कुड़ी (सैलाना) से लालाखेड़ा में सोयाबीन काटने मजदूरी करने आई रीना बाई (पति शांतिलाल मीणा, उम्र 24 वर्ष) को मंगलवार सुबह प्रसव पीड़ा होने पर खेत में ही सुरक्षित प्रसव कराया गया। राहत की बात यह है कि मां और नवजात बच्ची दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रीना बाई अपने प्रसव के पूर्ण समय (Full Term) पर थी। मंगलवार सुबह जैसे ही वह अपनी टापरी से पैदल बाहर निकली, उसे तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। दर्द असहनीय होने पर वह खेत में ही बैठ गई। परिस्थिति को देखते हुए लालाखेड़ा गांव के कमलेश सेन ने तुरंत जावरा सिविल हॉस्पिटल प्रभारी डॉ. दीपक पालड़िया को फोन कर स्थिति की जानकारी दी।
डॉ. पालड़िया का त्वरित संज्ञान, खेत में भेजी टीम
मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ. दीपक पालड़िया ने बिना देरी किए सिविल अस्पताल से एम्बुलेंस ड्राइवर शंकर माली के साथ दाई सुशीला शर्मा को डिलीवरी किट देकर तुरंत लालाखेड़ा रवाना किया। खेत में पहुंची दाई सुशीला शर्मा ने रीना बाई की मम्मी भूरीबाई और दाई विनीता सेन के सहयोग से खेत में ही सफलतापूर्वक डिलीवरी कराई।
न्यू मैटरनिटी विंग जावरा में भर्ती, 3.2 kg की स्वस्थ बच्ची
प्रसव के तुरंत बाद रीना बाई और उसकी नवजात बच्ची को जावरा के न्यू मैटरनिटी विंग लाया गया। लेबर रूम में डॉ. दीपक पालड़िया, श्वेता सिंह और शिरोमणि मसीह ने तुरंत चेकअप कर उपचार शुरू किया। डॉक्टरों के अनुसार बच्ची का वजन 3 किलो 200 ग्राम है और मां-बेटी दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं।
बताया गया कि रीना बाई की यह दूसरी डिलीवरी थी और उसकी सभी नियमित जांचें, टीकाकरण और दवाइयां समय पर पूर्ण हो चुकी थीं। रीना बाई की मां भूरीबाई ने डॉ. दीपक पालड़िया और पूरी मेडिकल टीम को धन्यवाद देते हुए सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की खुले दिल से सराहना की।
(उक्त जानकारी सिविल हॉस्पिटल के प्रभारी सुपरवाइजर शैलेंद्र कुमार दवे ने दी है।)