MP में पटवारियों और सरकार के बीच जंग: रतलाम में 4 पटवारी बर्खास्त, पूरे प्रदेश में ऑनलाइन काम बंद
मध्यप्रदेश में स्वामित्व योजना को लेकर शासन और पटवारियों के बीच टकराव चरम पर पहुँच गया है। रतलाम जिले में 4 परिवीक्षाधीन पटवारियों की सेवा समाप्त किए जाने के विरोध में प्रदेशभर के पटवारियों ने आज से ऑनलाइन कार्य बंद कर सरकारी व्हाट्सएप ग्रुप छोड़ दिए हैं। मांगे न मानने पर 8 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल और टोटल शटडाउन की चेतावनी दी गई है।
कल से टोटल शटडाउन की चेतावनी
भोपाल@newsmpg। मध्यप्रदेश में बीते 17 सितंबर से स्वामित्व योजना को लेकर शासन और पटवारियों के बीच चल रहा गतिरोध अब उग्र रूप ले चुका है। रतलाम जिले में 4 परिवीक्षाधीन (प्रोबेशनर) पटवारियों की सेवा समाप्त किए जाने के प्रशासनिक आदेश के बाद पूरे प्रदेश के पटवारियों में भारी रोष व्याप्त हो गया है।
कार्रवाई के विरोध में रतलाम सहित प्रदेशभर के पटवारियों ने आज 07 अक्टूबर से सभी ऑनलाइन राजस्व कार्यों को पूरी तरह बंद कर दिया है और शासन के सभी आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप्स से खुद को बाहर (एग्जिट) कर लिया है।
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मांग न मानने पर 8 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल
मध्यप्रदेश पटवारी संघ, शाखा रतलाम के जिलाध्यक्ष गोपाल रावत ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर चेतावनी दी है कि यदि रतलाम में बर्खास्त 4 पटवारियों की सेवा बहाली और अन्य जिलों में किए गए निलंबन की कार्रवाई को तत्काल वापस नहीं लिया गया, तो कल (08 अक्टूबर 2026) से रतलाम जिले के सभी पटवारी पूर्ण कार्य बहिष्कार (टोटल शटडाउन) कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
आखिर क्यों विरोध कर रहे हैं पटवारी?
संघ के अनुसार पटवारी शासन की किसी योजना के खिलाफ नहीं हैं और वर्तमान में भी पीएम किसान, फार्मर रजिस्ट्री जैसे 56 अलग-अलग विभागों के कार्य कर रहे हैं। पटवारियों की आपत्ति योजना से नहीं, बल्कि इसमें तय की गई उनकी भूमिका से है:
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योजना के तहत मौके पर बने पक्के मकान को कागज पर केवल "भूखंड" दर्शाकर रजिस्ट्री करवाई जा रही है। ऐसे झूठे दस्तावेजों के आधार पर निष्पादक (पटवारी), क्रेता और उप-पंजीयक (सब-रजिस्ट्रार) तीनों पर भविष्य में एफआईआर (FIR) और कानूनी कार्रवाई का जोखिम है।
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जमीनी स्तर पर नाम, रकबा और चौहद्दी में कई गंभीर गलतियाँ हैं। कई स्थानों पर एक ही मकान दो अलग-अलग लोगों के नाम पर दर्ज हो चुका है। इन त्रुटियों के निराकरण के बिना रजिस्ट्री करने से आम जनता को कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने पड़ेंगे।
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पटवारियों के पास संबंधित संपत्तियों के नक्शों की न तो कोई हार्ड कॉपी उपलब्ध है और न ही सॉफ्ट कॉपी।
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आदेश के अनुसार यह योजना मूल रूप से पंचायती राज विभाग की है, न कि राजस्व विभाग की; इसके बावजूद पटवारियों पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा है।
पटवारी संघ ने साफ कर दिया है कि जब तक शासन दंडात्मक कार्रवाई वापस नहीं लेता और उनकी व्यावहारिक समस्याओं का समाधान नहीं करता, आंदोलन और तेज होगा।