कलेक्टर पहुंचे किसान के खेत: खाट पर बैठकर खाए भुट्टे, बोले— "रतलाम-सैलाना जैसे मीठे ड्रैगन फ्रूट कहीं नहीं मिले"
रतलाम कलेक्टर अजय कटेसरिया ने सैलाना में कृषक शुभम पाटीदार के खेत पर पहुँचकर जैविक पद्धति से की जा रही ड्रैगन फ्रूट की खेती का अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने खेत पर खाट पर बैठकर भुट्टे और ड्रैगन फ्रूट का स्वाद लिया तथा किसान की मेहनत और नवाचार की खुलकर सराहना की।
रतलाम @newsmpg । कलेक्टर अजय कटेसरिया ने सैलाना स्थित कृषक शुभम पाटीदार के खेत पर पहुँचकर उन्नत जैविक पद्धति से की जा रही ड्रैगन फ्रूट की खेती का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने किसान से खेती की तकनीक, उत्पादन, लागत और जैविक तरीकों से जुड़ी जानकारी ली तथा खेत का भ्रमण कर बारीकियों को समझा।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने खेत पर ही खाट पर बैठकर कृषक पाटीदार व बच्चों के साथ ताजे भुट्टे, बालम ककड़ी और ड्रैगन फ्रूट का स्वाद लिया। भुट्टे का स्वाद लेते हुए उन्होंने कहा— ये बहुत मीठे हैं। कलेक्टर ने ड्रैगन फ्रूट की मिठास और गुणवत्ता की विशेष सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अन्य स्थानों पर भी ड्रैगन फ्रूट खाए हैं, लेकिन रतलाम-सैलाना के ड्रैगन फ्रूट जैसा मीठा स्वाद कहीं और देखने को नहीं मिला। उन्होंने किसान द्वारा किए जा रहे नवाचारों और कड़ी मेहनत की खुलकर प्रशंसा की।
जैविक खेती से मिल रहा अच्छा मुनाफा
कृषक शुभम पाटीदार ने बताया कि वे चार बीघा भूमि में पिछले दो वर्षों से तथा अन्य पांच बीघा भूमि में पिछले छह वर्षों से ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं। बाजार में ड्रैगन फ्रूट की मांग काफी अच्छी है और क्षेत्र में सीमित किसान ही इसकी खेती कर रहे हैं, जिससे उत्पाद आसानी से बिक जाता है और अच्छी आय अर्जित हो रही है। ड्रैगन फ्रूट की खेती पूरी तरह से जैविक (आॅर्गेनिक) पद्धति से की जाती है।
उद्यानिकी विभाग को दिए निर्देश
कलेक्टर अपनाई जा रही जैविक पद्धति और कृषि नवाचारों की सराहना की। इस दौरान उन्होंने मौके पर मौजूद उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों से ड्रैगन फ्रूट सहित अन्य नई फसलों की खेती की संभावनाओं और उनके तकनीकी पहलुओं की जानकारी ली तथा जिले में ऐसे नवाचारों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।