मेडिकल कॉलेज में छात्रों ने दिया धरना - कर्मचारी के रवैये से नाराज, लगाए कई गंभीर आरोप
छात्र अनुभाग में कार्यरत कर्मचारी दीपेश विरार पर छात्रों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कर्मचारी समय पर कार्यालय नहीं आते, जिससे काम में देरी होती है। पिछले 3 महीनों से स्टाइपेंड नहीं मिलने पर भी कोई समाधान नहीं किया गया। साथ ही, छात्रों ने अभद्र व्यवहार और धमकी भरी भाषा इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। मामले की शिकायत CM हेल्पलाइन पर भी की गई है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
Ratlam@newsmpg...रतलाम के मेडिकल कॉलेज (Dr Laxminarayan Medical College) में एक बार फिर से हंगामा हुआ। सोमवार को कई छात्र क्लास छोड़कर नाराज होकर धरने पर बैठ गए। इनकी शिकायत है कि कर्मचारी दीपेश विरार स्टाईफंड देने में उन्हें बहुत परेशान कर रहा है। इसके विरोध में काफी देर तक हंगामा मचा रहा।
छात्र अनुभाग में कार्यरत कर्मचारी दीपेश विरार के खिलाफ छात्रों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। छात्रों ने आरोप लगाया है कि उनकी लापरवाही और अभद्र व्यवहार के कारण उन्हें लगातार मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
घंटों इंतजार,बार-बार निवेदन
छात्रों के अनुसार, संबंधित कर्मचारी का निर्धारित समय सुबह 10 बजे है, लेकिन वे अक्सर करीब 11:30 बजे के बाद ही कार्यालय पहुंचते हैं। इससे छात्रों के जरूरी कार्यों में अनावश्यक देरी हो रही है और उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है। सबसे गंभीर मुद्दा स्टाइपेंड का है। छात्रों का कहना है कि पिछले तीन महीनों से उन्हें स्टाइपेंड नहीं मिला है। बार-बार निवेदन करने के बावजूद कोई ठोस जवाब या समाधान नहीं दिया जा रहा। छात्रों के मुताबिक, स्टाइपेंड के लिए आवश्यक उपस्थिति भेजने की जिम्मेदारी भी संबंधित कर्मचारी की है, लेकिन इस दिशा में लापरवाही बरती जा रही है।
अभद्र व्यवहार के आरोप
छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि समस्या बताने पर कर्मचारी का व्यवहार बेहद अपमानजनक रहता है। उन्होंने कथित तौर पर छात्रों से कहा, जो उखाड़ना है उखाड़ लो, तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते। इस तरह की भाषा से छात्रों में रोष और असंतोष बढ़ता जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए छात्रों ने उट हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई या समाधान सामने नहीं आया है। इससे छात्रों में निराशा का माहौल है। छात्रों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी छात्र को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।