मुख्यमंत्री रहते हुए जावरा से चुनाव हारने वाले डॉ कैलाशनाथ काटजू की पुण्यतिथि आज , क्या हुआ जब चुनाव जीतने वाले डॉ लक्ष्मीनारायण पांडेय से उनकी भोपाल में हुई मुलाकात !

रतलाम /भोपाल | डॉ. कैलाशनाथ काटजू की आज पुण्यतिथि है , डॉ काटजू मुख्यमंत्री रहते हुए जावरा से विधानसभा का चुनाव जनसंघ के डॉ लक्ष्मीनारायण पांडेय से हार गए थे।  मुख्यमंत्री डॉ काटजू से युवा विधायक पांडेय की एक मुलाकात ने बदल दिया था उनका नज़रिया . जानिए डॉ पांडेय और काटजू की मुलाकात का वो रोचक किस्सा।

रतलाम /भोपाल | डॉ. कैलाशनाथ काटजू की आज पुण्यतिथि है , डॉ काटजू मुख्यमंत्री रहते हुए जावरा से विधानसभा का चुनाव जनसंघ के डॉ लक्ष्मीनारायण पांडेय से हार गए थे।  युवा डॉ पांडेय ने राजनैतिक शुचिता का पहला पाठ काटजू साहब से ही पढ़ा था , 
डॉ पांडेय के जीवन पर आधारित ''युगपुरुष बाबूजी'' पुस्तक जिसे पगडण्डी मीडिया एंड पब्लिकेशन ने प्रकाशित किया है में ये किस्सा मौजूद है।  जानिए डॉ पांडेय और काटजू की मुलाकात का वो रोचक किस्सा।  

डॉ. काटजू से ही सीखा राजनीतिक शुचिता का पाठ

1962 के विधानसभा चुनाव में कैलाशनाथ काटजू को परास्त कर विधायक बने डॉ. लक्ष्मीनारायण पाण्डेय के जीवन का यह प्रसंग राजनीतिक शुचिता का अद्वितीय उदाहरण है।

चुनाव हारने के बाद भी डॉ. कैलाशनाथ काटजू कुछ समय तक मुख्यमंत्री पद पर बने रहे।
नव-निर्वाचित विधायक के रूप में डॉ. लक्ष्मीनारायण पाण्डेय विधानसभा सत्र में भाग लेने भोपाल पहुँचे।

उत्सुकतावश वे लालघाटी स्थित मुख्यमंत्री आवास पहुँच गए।
गार्ड को अपना परिचय दिया और मुख्यमंत्री से मिलने की इच्छा जताई।
गार्ड ने संदेश अंदर भिजवाया और डॉ. पाण्डेय को कुछ देर प्रतीक्षा करने के लिए कक्ष में बैठा दिया गया।

करीब बीस मिनट बाद डॉ. काटजू स्वयं बाहर आए।
डॉ. पाण्डेय ने हाथ जोड़कर नमस्कार किया।
डॉ. काटजू ने स्नेहपूर्वक उन्हें बैठने का संकेत दिया और स्वयं भी पास बैठ गए।

उन्होंने डॉ. पाण्डेय से कुशलक्षेम पूछा और जावरा की स्थिति के बारे में जानकारी ली।
डॉ. पाण्डेय ने कहा—

“आप जावरा को भली-भांति जानते हैं। वहाँ कोई विशेष परिवर्तन नहीं है।
परिणाम से सभी आश्चर्यचकित हैं।”

इस पर डॉ. काटजू बोले—

“ईश्वर को जो स्वीकार होता है, वही होता है।
किसी को भी दोष देना उचित नहीं है।
जावरा की कोई भी समस्या हो तो मुझे लिख भेजना।”

डॉ. पाण्डेय ने मुख्यमंत्री के साथ चाय पी और उनसे विदा ली।

इस छोटे से संवाद ने डॉ. लक्ष्मीनारायण पाण्डेय के राजनीतिक जीवन पर गहरा प्रभाव छोड़ा।
अपने शब्दों में उन्होंने लिखा—

“यह प्रसंग मेरे लिए अनुकरणीय बन गया।
इसके कारण जीवन को आदर्शपूर्वक बिताने की सीख मिली।
राजनीति में परस्पर सद्भावना, धैर्य एवं विवेक के साथ
सफर करने का पाठ यहीं से सीखा।”


डॉ. कैलाशनाथ काटजू से जुड़े प्रमुख तथ्य
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज स्वतंत्रता सेनानी डॉ. कैलाशनाथ काटजू का जन्म 17 जून 1887 को जावरा रियासत (वर्तमान रतलाम जिला, मध्यप्रदेश) में हुआ था। वे एक कश्मीरी पंडित परिवार से थे और 31 जनवरी 1957 से 11 मार्च 1962 तक मध्यप्रदेश के तीसरे मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने प्रमुख वकील, राज्यपाल और केंद्रीय गृह व रक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया। 
जन्म स्थान: जावरा, रतलाम जिला, मध्यप्रदेश (तत्कालीन जावरा रियासत)।
प्रारंभिक शिक्षा: उन्होंने जावरा के बार हाई स्कूल से शिक्षा प्राप्त की थी।
शिक्षा व करियर: लाहौर से उच्च शिक्षा और इलाहाबाद से विधि (Law) की पढ़ाई के बाद, वे 1908 में कानपुर और बाद में इलाहाबाद में प्रसिद्ध वकील बने।
राजनीतिक योगदान: काटजू भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य थे, उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई। वे 1957 में मंदसौर से लोकसभा सदस्य चुने जाने के बाद मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने।
निधन: उनका निधन 17 फरवरी 1968 को हुआ।